कौन हैं के वेंकट नारायणन?: CM विजय ने अपने करीबी को सौंपी अहम जिम्मेदारी, DMK ने नियुक्ति पर क्यों उठाए सवाल?
कौन हैं के. वेंकट नारायणन? मुख्यमंत्री विजय के कितने करीबी माने जाते हैं नारायणन? द्रमुक ने इस नियुक्ति पर क्या सवाल उठाए हैं?
कौन हैं के. वेंकट नारायणन? मुख्यमंत्री विजय के कितने करीबी माने जाते हैं नारायणन? द्रमुक ने इस नियुक्ति पर क्या सवाल उठाए हैं? क्या सरकार या टीवीके ने आलोचना पर प्रतिक्रिया दी है? सरकार के आदेश के अनुसार, के. वेंकट नारायणन को एक वर्ष की अवधि के लिए तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी। विशेष प्रतिनिधि का पद राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय का अहम माध्यम माना जाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति केंद्रीय मंत्रियों से संपर्क, मुख्यमंत्री की दिल्ली बैठकों की व्यवस्था और संसद सत्र के दौरान राज्य के सांसदों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का काम करता है।के.
वेंकट नारायणन तमिल फिल्म उद्योग के जाने-माने निर्माता हैं। वह केवीएन प्रोडक्शंस के प्रमुख हैं। उन्हें मुख्यमंत्री विजय का करीबी माना जाता है। नारायणन, विजय की आगामी राजनीतिक ड्रामा फिल्म 'जना नायकन' के मुख्य निर्माता भी हैं। यह फिल्म हाल के महीनों में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से प्रमाणन में देरी और रिलीज से पहले फिल्म के ऑनलाइन लीक होने के कारण चर्चा में रही है।नारायणन की मुख्यमंत्री विजय से नजदीकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मई 2026 में जब विजय ने राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया था, तब वह उनके साथ राजभवन भी पहुंचे थे।
राजनीतिक हलकों में उन्हें विजय के विश्वसनीय सहयोगियों में गिना जाता है। इसी वजह से उनकी नियुक्ति को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।मुख्य विपक्षी दल द्रमुक ने इस नियुक्ति का विरोध किया है। द्रमुक के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने कहा कि सरकार को ऐसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति करते समय राज्य के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक फिल्म निर्माता को इस पद पर नियुक्त करने का आधार क्या है। पी. विल्सन ने कहा कि इससे इस गरिमामय पद की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी और राष्ट्रीय राजधानी में तमिलनाडु का मजाक बन सकता है।द्रमुक की आलोचना के बावजूद मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) या तमिझगा वेत्री कड़गम की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल, राज्य की राजनीति में यह नियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
