चंपत राय के इस्तीफे की स्क्रिप्ट हरिद्वार में लिखी गई:rss ने फटकार लगाई, 25 जून की रात कहा- पद छोड़ दो
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दबाव में दिया। इसकी स्क्रिप्ट हरिद्वार में
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दबाव में दिया। इसकी स्क्रिप्ट हरिद्वार में लिखी गई। विश्व हिंदू परिषद की 18 और 19 जून को हरिद्वार में बैठक थी। इसमें अयोध्या से चंपत राय और गोपाल राव शामिल हुए थे। सूत्र बताते हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दोनों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जानकारी ली। चढ़ावे के हिसाब-किताब में हेराफेरी को लेकर दोनों को फटकार लगाई थी। बैठक के बाद चंपत राय पर दबाव बढ़ने लगा। संघ के बड़े पदाधिकारियों ने उनसे दूरी बनाने लगे। 19 जून को सीएम योगी अयोध्या दौरे पर गए थे। उस वक्त चंपत राय को सीएम के कार्यक्रमों से दूर रखा गया था। लगातार किरकिरी और बढ़ते दबाव को देखकर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने आखिरकार शुक्रवार को अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया। पूरी रात चंपत राय के पास RSS और विहिप नेताओं के फोन आए 7 जून को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके 18 दिन बाद ट्रस्ट के 8 लोगों पर FIR हुई। इसमें ट्रस्ट के बड़े चेहरों के नाम नहीं थे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर किरकिरी होने लगी। विपक्षी पार्टियों के लोग बयानबाजी करने लगे कि बड़े लोगों को बचा लिया गया। चंपत राय के पास RSS और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेताओं के फोन गुरुवार को पूरी रात आते रहे। कुछ नेताओं ने उन्हें इस्तीफा देकर मामला शांत करने की सलाह दी।
इसके बाद चंपत राय ने शुक्रवार सुबह पूजा-पाठ किया। फिर मणि रामदासजी की छावनी पहुंचे। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को भी बुलाया। सुबह करीब 11 बजे दोनों ने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे की 5 बड़ी वजहें जानिए… 1. शुरुआती जांच में भूमिका पर सवाल चढ़ावा चोरी की जांच के लिए बनी SIT की शुरुआती जांच में दान, चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिले। चंपत राय भी संदेह के दायरे में हैं। 2. FIR और गिरफ्तारियों से बढ़ा दबाव SIT की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा। इससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया। 3. पूर्व ड्राइवर का नाम सामने आने से बढ़ीं मुश्किलें FIR में चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष का नाम भी शामिल है। आरोप है कि टिन्नू ने मंदिर से जुड़े कुछ लोगों के साथ मिलकर चढ़ावे में हेराफेरी की, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया। 4. जांच पर सवाल न उठे, इसलिए इस्तीफा ट्रस्ट का मानना था कि अगर सीनियर पदाधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कारण उन्होंने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका देने के लिए पद छोड़ दिया। 5. राम मंदिर ट्रस्ट की साख बचाने की कोशिश राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ट्रस्ट नहीं चाहता था कि जांच के दौरान संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, इसलिए पद छोड़ना उचित समझा।