15 मौतों के बाद जागी सरकार: कोलकाता की ऊंची इमारतों की होगी जांच, नियम पूरे होने पर मिलेगी निर्माण की मंजूरी
पश्चिम बंगाल सरकार शुक्रवार से कोलकाता और आसपास के इलाकों में ऊंची रिहायशी और कमर्शियल इमारतों के मंजूर नक्शों (प्लान) की स्पेशल ऑडिट शुरू करने
पश्चिम बंगाल सरकार शुक्रवार से कोलकाता और आसपास के इलाकों में ऊंची रिहायशी और कमर्शियल इमारतों के मंजूर नक्शों (प्लान) की स्पेशल ऑडिट शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि इसके लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी शुक्रवार को अपनी पहली बैठक करेगी और जांच की प्रक्रिया शुरू करेगी। बता दें कि दो दिन पहले कोलकाता में एक गोदाम गिरने से 15 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने पिछली टीएमसी सरकार के दौरान मंजूर हुए सभी निर्माणाधीन कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की व्यापक जांच कराने का आदेश दिया था। साथ ही इन प्रोजेक्ट्स पर 31 जुलाई तक काम रोकने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह पूरी तरह से बैन नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस प्रोजेक्ट या वार्ड की जांच पहले पूरी हो जाएगी और वह सभी मानकों पर सही पाया जाएगा, वहां निर्माण कार्य तुरंत दोबारा शुरू करने की अनुमति दे दी जाएगी।
उन्होंने कहा, 'हमारा मकसद शहरी विकास रोकना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।' मुख्यमंत्री ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी राजेश पांडे की अध्यक्षता वाली कमेटी इस ऑडिट का काम करेगी। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी, RITES और IIT खड़गपुर के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।उन्होंने कहा कि पहले चरण में नोटिफाइड इलाकों की सभी ऊंची रिहायशी और कमर्शियल इमारतों के मंजूर प्लान की जांच होगी। इसके बाद मौके पर जाकर यह देखा जाएगा कि निर्माण मंजूर नक्शे और सुरक्षा मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं। पहले चरण में कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, बिधाननगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, राजारहाट-न्यू टाउन, कल्याणी, बारुईपुर, बज बज, महेशतला और राजपुर-सोनारपुर को शामिल किया गया है। इसके अलावा साउथ दमदम, कमारहाटी, बारानगर और हावड़ा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कुछ हिस्सों की भी जांच होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो रेलवे, नेशनल हाईवे और केंद्र व राज्य सरकार की अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को इस ऑडिट से बाहर रखा गया है।मुख्यमंत्री ने बताया कि जांच के बाद हर प्रोजेक्ट को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा रिजेक्शन (अस्वीकृति), रेक्टिफिकेशन (सुधार) और क्लीयरेंस (मंजूरी)।
पहले श्रेणी में उन परियोजनाओं को रखा जाएगा जिन परियोजनाओं में गंभीर नियम उल्लंघन या बड़ी खामियां मिलेंगी। इस दौरान उन्हें खारिज किया जाएगा। इसके बाद दूसरी श्रेणी में रेक्टिफिकेशन प्रोजेक्ट को रखा जाएगा। इनमें कमियों को दूर करने का निर्देश दिया जाएगा। तीसरी और आखिरी श्रेणी में क्लीयरेंस को रखा जाएगा। इसमें वो प्रोजेक्ट होंगे जो सभी नियमों का पालन करते मिलेंगे। तीसरी श्रेणी के प्रोजेक्ट को निर्माण दोबारा शुरू करने की मंजूरी तुरंत मिल जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित मरम्मत, रेनोवेशन, क्षतिग्रस्त हिस्सों की बहाली और पहले से मंजूर रिहायशी इमारतों में स्वीकृत विस्तार इस ऑडिट के दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने बताया कि कमेटी को ऊंची और कमर्शियल इमारतों में फायर सेफ्टी सिस्टम, लाइटनिंग अरेस्टर, फायर फाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और फायर लाइसेंस की जांच के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय भी दिया गया है।इसके अलावा चिन्हित शहरी इलाकों में जल निकायों (वॉटर बॉडी) का भी ऑडिट कराया जाएगा।
