मर्डर मिस्ट्री: प्रयागराज में मुंबई पुलिस खोजने आई एक राजेश को, वहां मिले तीन, ऐसे हुई असली कातिल की पहचान
21 साल में किसी भी आदमी का हुलिया इतना बदल जाता है कि उसकी शिनाख्त करना बहुत आसान नहीं होता। मुंबई से सटे वसई की
21 साल में किसी भी आदमी का हुलिया इतना बदल जाता है कि उसकी शिनाख्त करना बहुत आसान नहीं होता। मुंबई से सटे वसई की क्राइम ब्रांच की टीम के लिए भी यह बहुत मुश्किल काम था। उन्हें 21 साल पुराने मर्डर केस में राजेश सोनकर नाम के आरोपी के बारे में कुछ टिप मिली। पता चला कि वह इन दिनों यूपी के प्रयागराज के तालुका पुरामुप्ती कोसंबी के एक गांव में रह रहा है। वसई से एक टीम उस गांव पहुंची। सीनियर इंस्पेक्टर अविनाश कुराडे ने बताया कि उस गांव में जिस मोहल्ले का अड्रेस हमें बताया गया था, जब हमारी टीम उस मोहल्ले पहुंची, तो वहां हमें तीन राजेश सोनकर के बारे में जानकारी मिली। ऐसे में सवाल यह था कि इनमें से असली कातिल को कैसे पहचाना जाए। क्राइम ब्रांच को यह जानकारी थी कि जिस राजेश सोनकर की उन्हें तलाश है, उसकी पत्नी मुस्लिम है।
उसी में मुस्लिम पत्नी वाले राजेश सोनकर के बारे में फिर पता किया गया और 25 जून को सब-इंस्पेक्टर संतोष घाडगे, अजीत गिते और अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वहां से आरोपी को मुंबई लाया जा रहा है।एसीपी मदन बल्लाल के अनुसार, यह केस साल 2005 का मुंबई के पास विरार पुलिस स्टेशन का है। गिरफ्तार आरोपी राजेश सोनकर और उसका एक दोस्त दिलीप चव्हाण विरार के एक डांस बार में वेटर के तौर पर काम करते थे। राजेश की पत्नी को एक दिन बहाने से दिलीप ने बुलाया और फिर दिलीप अपने किसी अन्य दोस्त के पास राजेश की पत्नी को लेकर गया। पत्नी ने यह बात जब अपने पति को बताई, तो राजेश का खून खौल उठा। उसने फिर दिलीप का मर्डर करने का प्लान बनाया। वह विरार से यूपी में अपने गांव आया। वहां से किसी से पिस्टल और कारतूस खरीदे और कुछ दिन बाद वापस विरार आ गया।इसके बाद उसने बहाने से दिलीप चव्हाण को बुलाया।
जब राजेश सोनकर का फोन आया, तो डांस बार में स्टाफ में कुछ लोग यह कॉल सुन रहे थे। राजेश इसके बाद दिलीप को विरार में आगाशी इलाके में ले गया। उसने उसके सीने पर पिस्टल रखी और स्ट्रिगर भी दबाया, लेकिन पिस्टल से गोलियां निकली ही नहीं। इसके बाद उसने पिस्टल को दिलीप के सिर पर कई बार इतना मारा कि वह लहूलुहान होकर गिर गया। दिलीप की वहीं मौत हो गई। दिलीप की लाश को सूनसान जगह फेंक कर राजेश सोनकर अपनी मुस्लिम पत्नी के साथ वहां से भाग गया और प्रयागराज अपने गांव आ गया। इधर जब विरार के बार में दो दिन तक दिलीप चव्हाण नहीं आया, तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। बाद में उसकी लाश मिलने पर पुलिस ने मर्डर केस दर्ज किया।जब पुलिस टीम ने डांस बार के स्टाफ से पूछताछ की, तो सभी ने बताया कि दो दिन पहले राजेश सोनकर का फोन दिलीप के पास आया था।
इसलिए शक है कि दिलीप का मर्डर राजेश सोनकर ने ही किया हो। चूंकि राजेश भी फौरन विरार से गायब हो गया था, इसलिए पुलिस का शक उस पर ही गया। लेकिन उसका ठिकाना नहीं मिल रहा था। छह महीने पहले वसई क्राइम ब्रांच को पता चला कि राजेश सोनकर लखनऊ में ई-रिक्शा चला रहा है। सहायक निरीक्षक सोपान पाटील अन्य पुलिस कर्मियों के साथ लखनऊ गए, उसकी वहां कई दिन खोजबीन की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। कुछ दिन पहले राजेश सोनकर के बारे में पता चला कि वह प्रयागराज में अपने गांव आया हुआ है। इसके बाद फिर एक नई टीम उसकी तलाश में प्रयागराज भेजी गई। इसी में आरोपी गुरुवार को वहां पकड़ा गया। इस तरह कत्ल का यह केस 21 साल बाद सुलझा।
