Ops Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में शहीद सैनिकों के नाम हुए सार्वजनिक, सरकार ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर किया जिक्र
किन छह वीर जवानों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं? बलिदानी सपूतों को कौन-कौन से सम्मान मिले? राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में कैसे दी जाती है
किन छह वीर जवानों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं? बलिदानी सपूतों को कौन-कौन से सम्मान मिले? राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में कैसे दी जाती है श्रद्धांजलि? ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाया गया एक सीमापार सैन्य अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना और उन्हें नष्ट करना था। इस मिशन के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, अभियान के दौरान कुछ सैन्य कर्मियों ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
अब सरकार ने उनके नाम सार्वजनिक कर उनके बलिदान को औपचारिक सम्मान दिया है।सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार बलिदान देने वाले सैन्य कर्मियों में सेना के पांच और भारतीय वायुसेना का एक जवान शामिल हैं। इनमें मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड के सूबेदार मेजर पवन कुमार, चार जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के राइफलमैन सुनील कुमार, पांच फील्ड रेजिमेंट के लांस नायक दिनेश कुमार, 851 लाइट रेजिमेंट के अग्निवीर मूड मुरलीनायक, 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी के हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना की 39 विंग के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं।
इन सभी के नाम अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ग्रेनाइट दीवारों पर भी अंकित किए जाएंगे।ऑपरेशन सिंदूर में बलिदान देने वाले राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया है, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। आठ जून को आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनके परिजनों को प्रदान किया। यह पुरस्कार उनके माता-पिता सुदेश कुमारी और यश पाल ने ग्रहण किया। वहीं, भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को मरणोपरांत वायु पदक से सम्मानित किया गया है।नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में 'त्याग चक्र' नाम का एक विशेष स्मारक क्षेत्र है, जिसमें ग्रेनाइट से बनी 16 गोलाकार दीवारें हैं।
इन दीवारों की प्रत्येक ईंट पर स्वतंत्रता के बाद देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों का नाम, रैंक और उनकी रेजिमेंट अंकित की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीर जवानों के नाम भी अब इसी स्मारक का स्थायी हिस्सा बन गए हैं। इनके नाम की भी ईंट अब इस स्मारक का हिस्सा बनेगी।
