Ncert ने सोशल साइंस किताब से संविधान की प्रस्तावना हटाई:सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्दों का भी जिक्र नहीं; इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा
NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया
NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन 'सॉवरेन' (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न), 'सोशलिस्ट' (समाजवादी), 'सेक्युलर' (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), 'डेमोक्रेटिक' (लोकतांत्रिक) और 'रिपब्लिक' (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। 1976 में संविधान में सेकुलर शब्द जुड़ा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'सेकुलर' (पंथनिरपेक्ष), 'सोशलिस्ट' (समाजवादी) और 'इंटीग्रिटी' (अखंडता) जोड़े गए थे। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी।
बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है। मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं।