90 करोड़ का श्मशान घाट, ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया:अंतिम संस्कार में लगेंगे 5 हजार, पटना-मुंगेर में 1 रुपए में मिलेगी 17 एकड़ जमीन
पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए VVIP व्यवस्था शुरू हो गई है। गंगा किनारे स्थित बांस घाट श्मशान को अत्याधुनिक बना दिया गया है।
पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए VVIP व्यवस्था शुरू हो गई है। गंगा किनारे स्थित बांस घाट श्मशान को अत्याधुनिक बना दिया गया है। यहां एक साथ 18 शवों को जलाने की व्यवस्था है। अंतिम यात्रा में आए लोगों के बैठने के लिए 2 AC वेटिंग हॉल हैं। 90 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए श्मशान को सरकार ने संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार फ्री में नहीं होगा। इसके लिए 3500 से 5000 रुपए तक खर्च करने होंगे। जबकि दीघा, गुलबी और खाजकला के सरकारी घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए 300 रुपए की रसीद कटती है। यही नहीं, इस संस्था को बिहार सरकार पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में 1-1 रुपए की लीज पर 17 एकड़ जमीन देने जा रही है। बांस घाट श्मशान क्यों खास है? यहां क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? पटना के दीघा श्मशान में क्या होगा? मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को क्यों 15 एकड़ जमीन मिलने वाली है? पढ़िए रिपोर्ट..। 4.5 एकड़ में फैले श्मशान में एक साथ जलेंगी 18 चिताएं पटना का बांसघाट श्मशान 4.5 एकड़ में फैला है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसे 89.40 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। यहां पहले मौजूद श्मशान 1.24 एकड़ में फैला था। यहां एक साथ 18 चिताएं जलाने की व्यवस्था की गई है। शव जलाने के लिए हैं ये तीन तरह की व्यवस्थाएं… इलेक्ट्रिक शवदाह गृह: शव जलाने के लिए चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं। इसमें 15 से 20 मिनट में शव जलकर राख हो जाता है। ये लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। वुड क्रीमेसन ओवन: 6 वुड क्रीमेसन ओवन हैं। इसे बिहार की कंपनी ने तैयार किया हैं। इसमें शव जलाने में कम लकड़ी लगती है। शव 20-25 मिनट में राख हो जाता है। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी लगाई गई है। पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल: 8 पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल भी हैं।
यहां शव को पारंपरिक तरीके से चिता पर रखकर जलाया जाता है। शव जलाने में खर्च होंगे 5 हजार रुपए श्मशान में शव जलाने की न्यूनतम फीस 3500 रुपए है। डोम, पंडित और दूसरे खर्च जोड़ दें तो यह कम से कम 5000 रुपए तक पहुंच जाता है। अगर शव को लकड़ी से जलाना है तो अलग से लकड़ी खरीदनी होगी। यह श्मशान परिसर में मिल जाएगी। शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम है। इसमें मोर्चरी फ्रीजर की व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए हैं चार दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं। यहां कपड़ा, डीप गप्स क्लोथ, लेस गप्स क्लोथ, एकरंगा क्लोथ, राम नाम पट्टी, धोती, घी, चंदन की लकड़ी, देवदार, अगरबत्ती, कपूर, गुलाब जल, पंचमेवा, साड़ी, चूना, माचिस, जौ, हवन सामग्री सहित अन्य जरूरी सामान मिल जाएंगे। 42 फीट ऊंचे हैं मोक्ष और बैकुंठ द्वार आकर्षण का मुख्य केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं। इसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों की ऊंचाई 42 फीट है। एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह स्थापित किया गया है। इन्हें जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं। इनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी लाया जाता है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होती और लोग गंगा में अस्थी विसर्जन भी कर पाते हैं। एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है।