13 बार मानसून लेट, 7 बार ज्यादा बारिश:3 बार वक्त से पहले आया तो 25% तक कम बरसा, राजस्थान का 30 साल का एनालिसिस
राजस्थान में मानसून की धीमी रफ्तार और देरी चर्चा में है। पिछली बार मानसून 7 दिन जल्दी पहुंच गया था। बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिए
राजस्थान में मानसून की धीमी रफ्तार और देरी चर्चा में है। पिछली बार मानसून 7 दिन जल्दी पहुंच गया था। बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस बार इतनी ही दिन देरी से यहां पहुंचने की आशंका है। आशंका यह भी है कि देरी से आया मानसून उतना नहीं बरसेगा, जितना समय पर या समय से पहले आने पर बरसता है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के अगले सप्ताह राजस्थान पहुंचने की उम्मीद है। 10 फीसदी तक कम बारिश की भी आशंका जताई है। इस बीच भास्कर ने 1996 से लेकर 2025 तक यानी 30 साल के डेटा का एनालिसिस किया। इसमें सामने आया कि 30 साल में केवल 2 बार तय समय पर मानसूनी बादल राजस्थान से टकराए हैं। 15 बार मानसून समय से पहले और 13 बार देरी से आया है। इतना ही नहीं, 7 बार देरी से आया मानसून भी जमकर बरसा। 3 बार समय से पहले मानसून आया। इस दौरान जरूर 25% तक कम बारिश हुई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 3 बार सबसे ज्यादा लेट, एक बार तोड़ डाला रिकॉर्ड मौसम विभाग में पिछले 30 साल के दौरान मानसून आने के अनुमानों की तारीख हमेशा बदलती रही है। अमूमन यह 20 से 25 जून के बीच की रही है।
वहीं सामान्य बारिश अलग-अलग वर्षों में 415 से 435.6 मिलीमीटर (MM) तक मानी जाती रही है। इस एनालिसिस में मानसून आने की सामान्य तारीख को 25 जून मानकर जल्दी या देरी के दिन तय किए गए हैं। साल 2012 में मानसून सबसे ज्यादा 8 दिन लेट आया, लेकिन अगस्त में हुई बारिश ने सबकी चिंता दूर कर दी। 2012 में सामान्य से 11 फीसदी अधिक बारिश हुई। साल 2019 में 7 दिन देरी से मानसून राजस्थान पहुंचा, लेकिन बरसात में कोई कमी नहीं रही। 2019 में तीन दशकों में पहली बार बारिश का आंकड़ा 550 MM से पार पहुंच गया। खास बात यह रही कि मानसून ने पहले ही दिन राजस्थान के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया। साल 2014 में मानसून में 7 दिन की देरी दर्ज की गई। तब बरसात लगभग सामान्य जैसी ही रही। आंकड़े बताते हैं कि देरी से (जुलाई में) दस्तक देने वाले मानसून ने पिछले 30 सालों में अब तक कभी बारिश के आंकड़े माइनस में नहीं पहुंचाए। 10 बार 5 दिन तक की देरी से एंट्री मानसून 10 बार 5 दिन तक की देरी से राजस्थान में दाखिल हुआ। इन 10 अलग-अलग सालों में 5 बार सामान्य से अधिक और इतनी ही बार सामान्य से कम बरसात हुई।
इनमें साल 2006 सबसे चौंकाने वाला रहा। मानसून 2 दिन की देरी से पहुंचा। अगस्त 2006 के आखिरी हफ्ते में बाड़मेर में पूरे साल के औसत से 5 गुना अधिक बारिश हो गई, बाढ़ आ गई। वहीं, 2002 और 2009 में मानसून 4-4 दिन देरी से था और दोनों बार सूखा पड़ा। 2022 में मानसून 5 दिन की देरी से था, लेकिन 596 MM बरसात ने राजस्थान को तर कर दिया। इस दौरान पूर्वी राजस्थान में करीब 781 MM बारिश दर्ज हुई। साल 2010 में मानसून एक दिन देरी से था, लेकिन बारिश करीब 540 एमएम दर्ज की गई। आमतौर पर पूर्वी राजस्थान में अधिक बरसात होती है, लेकिन उस दौरान पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान में लगभग 27 फीसदी बरसात अधिक हुई। 2 बार तय समय पर आया और दोनों बार कर गया तर 30 साल में 2 बार ही मानसून तय समय पर राजस्थान पहुंचा। खास बात यह रही कि दोनों ही बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। 2024 में करीब 679 MM बरसात हुई थी। 2023 में भी सामान्य से 15% ज्यादा बारिश हुई। 4 बार सबसे जल्दी, तोड़ा 108 साल का रिकॉर्ड राजस्थान में 30 साल में 4 बार सबसे जल्दी मानसून पहुंचा।