'आपातकाल इतिहास का काला अध्याय': अमित शाह का कांग्रेस पर प्रहार, कहा- कुचली गई संविधान की आत्मा
मोदी सरकार की ओर से घोषित 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह संदेश साझा किया। उन्होंने
मोदी सरकार की ओर से घोषित 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह संदेश साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे अंधकारमय दौर था।गृह मंत्री अमित शाह ने इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह दिन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का वह काला अध्याय है, जब इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने सत्ता के अहंकार और लालच में आकर देश के नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी पर ताला लगा दिया था।शाह ने कहा कि इस दौरान न केवल प्रेस की स्वतंत्रता को छीना गया, बल्कि संविधान की मूल भावना को भी नष्ट करने की पूरी कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि उस समय के शासकों के लिए देश के लोकतांत्रिक मूल्य उनकी व्यक्तिगत सत्ता की भूख के सामने बेहद बौने साबित हो गए थे।इस खास मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन सभी लोगों को याद किया, जिन्होंने आपातकाल का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने कहा, 'संविधान हत्या दिवस के अवसर पर मैं लोकतंत्र के उन सभी योद्धाओं को अपनी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आपातकाल के क्रूर शासन के खिलाफ एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी।'अमित शाह ने आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले और यातनाएं सहने वाले सत्याग्रहियों के साहस की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि इन सेनानियों के संघर्ष के कारण ही देश में दोबारा लोकतंत्र की बहाली संभव हो सकी थी।अमित शाह ने मोदी सरकार की ओर से 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाने का एकमात्र मकसद देश की आने वाली पीढ़ियों की स्मृति में इस काले अध्याय को जिंदा रखना है।गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इतिहास की यह सीख आने वाले समय में देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि इस दिवस को मनाने से यह सुनिश्चित होगा कि कांग्रेस पार्टी या कोई भी अन्य दल भविष्य में कभी भी भारत के लोकतंत्र और पवित्र संविधान पर इस तरह का हिंसक हमला करने का दुस्साहस न कर सके।
