Lucknow, India

गर्मी की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह नहीं रहेगा बंद, 7300 से ज्यादा मुकदमों की होगी सुनवाई

Published 24 May 2026 · india

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठें आंशिक कार्य दिवसों के दौरान यानी एक जून से लेकर 10 जुलाई तक 7300 से अधिक मुकदमों की सुनवाई करेंगी। सुप्रीम कोर्ट में हर साल जून में गर्मी की छुट्टियां होती हैं। इस वर्ष भी 1 जून से 10 जुलाई तक

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठें आंशिक कार्य दिवसों के दौरान यानी एक जून से लेकर 10 जुलाई तक 7300 से अधिक मुकदमों की सुनवाई करेंगी। सुप्रीम कोर्ट में हर साल जून में गर्मी की छुट्टियां होती हैं। इस वर्ष भी 1 जून से 10 जुलाई तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी लेकिन इस दौरान कोर्ट पूर्णत: बंद नहीं रहेगा। इस दौरान आंशिक कार्य दिवस रहेंगे जिसमें कुछ पीठें मुकदमों की सुनवाई के लिए रोजाना बैठेंगी, जिनमें अत्यंत आवश्यक मामलों के अलावा पुराने लंबित नियमित मुकदमों की भी सुनवाई की जाएगी।

अभी तक कोर्ट ने आंशिक कार्य दिवसों पर सुनवाई के लिए लगने वाले मुकदमों की जो सूची जारी की है उसमें कुल 7334 मामले सुनवाई पर लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों पर होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक शुरुआत में आंशिक कार्य दिवसों पर सुनवाई के लिए 13565 मिसलेनियस मैटर और 10567 नियमित यानी रेगुलर सुनवाई के मामले लिस्ट किए गए। इनमें से लगभग 3102 मिसलेनियस मामलों और 4232 नियमित सुनवाई के मामले ऐसे हैं जिनमें या तो किसी भी वकील ने सुनवाई से इन्कार नहीं किया है या फिर 50 प्रतिशत से कम ने सुनवाई से इनकार किया है।

ऐसे में इन मामलों को आंशिक कार्य दिवसों पर सुनवाई के लिए लिया गया है, बशर्ते कि सुनवाई का स्लाट उपलब्ध हो। नोटिस में कहा गया है कि मिसलेनियस मैटर जिनमें की नये मामले, नोटिस जारी होने के बाद के मामले प्रत्येक सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को सुने जाएंगे। जबकि नियमित सुनवाई के मुकदमे इसके अलावा अर्जेंन्ट सुनवाई की जरूरत वाले मामलों पर प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को सुनवाई होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी नये मामले जो आंशिक कार्य दिवसों के दौरान दाखिल होंगे या दोबारा दाखिल या सत्यापित किये गए होंगे, उन्हें ऑटो लिस्टिंग शिड्यूल के मुताबिक उसी अवधि के दौरान सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।

इनमें जमानत के मामले भी शामिल हैें। कहा गया है कि जिन मामलों में तत्काल सुनवाई की जरूरत होगी, उनमें संबंधित वकील या पक्षकार मेंशनिंग ब्रांच के सामने केस का जिक्र कर सकते हैं। आंशिक कार्य दिवसों पर हाईब्रिड सुनवाई का विकल्प भी उपलब्ध होगा। यानी वकीलों और पक्षकारों के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी पेश होने का विकल्प होगा। खबरें और भी

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