सीआरपीएफ: 263 ग्राउंड कमांडरों को मिली पदोन्नति, सहायक कमांडेंट से डिप्टी कमांडेंट बनने में लगे 15 साल
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में लगभग 263 ग्राउंड कमांडर यानी 'सहायक कमांडेंट' को 15वें साल में पहली पदोन्नति मिल गई है।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में लगभग 263 ग्राउंड कमांडर यानी 'सहायक कमांडेंट' को 15वें साल में पहली पदोन्नति मिल गई है। बृहस्पतिवार को सीआरपीएफ महानिदेशालय की तरफ से पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश (सिविल अपील संख्या 4585-4586/2025) के पालन में सरकार की तरफ से डीजी सीआरपीएफ ने सहायक कमांडेंट को डिप्टी कमांडेंट (जीडी) बनाने की मंजूरी दी है। यह पदोन्नति पे मैट्रिक्स लेवल-11 (67700 रुपये से 208700 रुपये) में होगी और 2024 की रिक्तियों के लिए पद का कार्यभार संभालने की तारीख से लागू मानी जाएगी। बता दें कि सर्वोच्च अदालत ने विभागीय पदोन्नति कमेटी 'डीपीसी' पर स्टे लगा रखा था। दो माह पहले वह स्टे हट गया था।
सीआरपीएफ मुख्यालय ने 17 अप्रैल को सभी जोन, ग्रुप सेंटर, यूनिटों एवं दूसरी इकाइयों को आदेश दिया था कि वे उन सहायक कमांडेंट (जीडी) की मेडिकल रिपोर्ट, अति आवश्यक आधार पर भेजें, जिन्हें डिप्टी कमांडेंट (जीडी) की पदोन्नति मिलने जा रही है। पदोन्नति पाने वालों में सीआरपीएफ के 43वें बैच के सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी, विभागीय प्रवेश वाले राजपत्रित अधिकारी और सीधे नियुक्त अधीनस्थ अधिकारी/स्थानीय पदोन्नत अधिकारी शामिल हैं।इस मामले में सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह का विशेष योगदान रहा है। सैनिक सम्मेलन और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान जब भी सहायक कमांडेंट द्वारा उनकी पदोन्नति में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाया गया, डीजी ने कहा था कि वे गंभीरता से इस मामले पर काम कर रहे हैं। अदालत में केस की पैरवी करना हो या गृह मंत्रालय में मजबूती से अफसरों का पक्ष रखना, इसमें कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही।
उन्होंने अफसरों को आश्वस्त किया था कि बहुत जल्द उन्हें पदोन्नति मिलेगी। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। डीजी सिंह ने बल महानिदेशालय में दिल्ली एनसीआर के अधिकारियों के कंधे पर डिप्टी कमांडेंट का रैंकसुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डीपीसी से स्टे हटने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ही संबंधित ग्राउंड कमांडरों की वरिष्ठता तय करेगा। सर्वोच्च अदालत में सहायक कमांडेंट की 'डेट ऑफ ज्वाइनिंग' को लेकर गलती सुधार हो गया है। पिछले कई वर्षों से यह मामला अदालत में लंबित था। इसके चलते रिक्तियां होते हुए भी सहायक कमांडेंट को पदोन्नति नहीं मिल पाई।पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पदोन्नति के मुद्दे को गौर से सुना।
उन्हें बताया गया कि ग्राउंड कमांडरों को वाकई पहली पदोन्नति मिलने में बहुत अधिक वक्त लग रहा है। बैठक में यह बात भी सामने आई कि पदोन्नति न होने के पीछे अदालत में चल रहा मामला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, इस मामले में काफी संजीदा नजर आए। उन्होंने निर्देश दिए कि अदालत में इस केस की ठोस पैरवी कर पदोन्नति का रास्ता खोला जाए। उस बैठक में सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे। पदोन्नति के इस गतिरोध को खत्म कराने के लिए वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय ली गई।
