Lucknow, India

आसमान से बरस रही आग ने उड़ाई रातों की नींद, छीना दिन का चैन

Published 24 May 2026 · health

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पूरा उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी और लू से बेहाल है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व बिहार समेत कई राज्यों में गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित है। दिन के साथ रात का तापमान भी बढ़ने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पूरा उत्तर भारत इन दिनों भीषण गर्मी और लू से बेहाल है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व बिहार समेत कई राज्यों में गर्मी के कारण जनजीवन प्रभावित है। दिन के साथ रात का तापमान भी बढ़ने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। लोग नींद पूरी नहीं ले पा रहे हैं, जिससे चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। लू के कारण हीट स्ट्रेस, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान, और त्वचा संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। सिरदर्द, चक्कर आने, आंखों में धुंधला दिखने जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश में समस्या ज्यादा गंभीर है। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 300 मरीज आते हैं, जिनमें से इन दिनों 50 से 60 मरीज तेज सिरदर्द और चक्कर के आ रहे हैं।

उल्टी-दस्त के 28 मरीज भर्ती हुए हैं। डिहाइड्रेशन के मरीज भी आ रहे हैं। अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या कानपुर के अस्पतालों में भी नींद और बेचैनी की समस्या के साथ प्रतिदिन 250 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें युवा, बुजुर्ग, महिला और बच्चे तक शामिल हैं। मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी ने बताया कि ज्यादातर मरीजों को चिड़चिड़ापन, नींद नहीं आने और बेचैनी की समस्या है। मेडिसिन विभाग में हर दिन 120 से ज्यादा मरीज नींद नहीं आने और पेट संबंधित बीमारियों की शिकायत के साथ पहुंच रहे हैं। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी इस तरह के मरीज बढ़ रहे हैं। पंजाब के अस्पतालों में रात को नींद न आने, घबराहट और बीपी बढ़ने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक यूनिट के निदेशक डा. अजय चौहान बताते हैं कि हीट स्ट्रेस की स्थिति में शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ने लगता है। खबरें और भी अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स यानी सोडियम-पोटैशियम जैसे आवश्यक लवणों की कमी हो जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण होता है। खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। गंभीर स्थिति में हीट एग्जर्शन यानी अत्यधिक गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक यानी लू लगने की स्थिति हो सकती है, जिसमें शरीर तापमान नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। इन अंगों पर पड़ता है असर लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण दिमाग, हृदय, किडनी, फेफड़े, त्वचा व मांसपेशियों से जुड़ी समस्या बढ़ जाती है।

इसलिए तेज बुखार, चक्कर और उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और भ्रम या उलझन की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए। बढ़ जाती है आक्रामकता विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान बढ़ने पर मानसिक तनाव और आक्रामकता में वृद्धि देखी जाती है। चिड़चिड़ापन, असहनशीलता, बेचैनी, तनाव और चिंता बढ़ने के साथ ही काम में मन न लगने की समस्या बढ़ जाती है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ गर्भवती महिलाओं पर इसका दुष्प्रभाव ज्यादा दिखता है। हृदय, किडनी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों की समस्या बढ़ जाती है।

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