Ebola Virus: भारत से अफ्रीका गई मेडिकल मदद की पहली खेप; इबोला संक्रमण कितना घातक? पूर्व AIIMS निदेशक ने बताया
इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अफ्रीका के देशों को बड़ी राहत देते हुए जरूरी मेडिकल सप्लाई और सुरक्षा किट की पहली खेप भेज दी है। यह सहायता अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) को भेजी गई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने
इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अफ्रीका के देशों को बड़ी राहत देते हुए जरूरी मेडिकल सप्लाई और सुरक्षा किट की पहली खेप भेज दी है। यह सहायता अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) को भेजी गई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस मुश्किल समय में अफ्रीका के साथ मजबूती से खड़ा है और स्वास्थ्य संकट से निपटने में पूरा सहयोग देगा। 🇮🇳 dispatched the first tranche of urgent medical supplies and protective kits to @AfricaCDC today. Committed to support Africa in responding to the emerging Ebola public health emergency. @_AfricanUnion pic.twitter.com/2OHhSARXUY— Dr. S.
Jaishankar (@DrSJaishankar) May 24, 2026 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा को प्रभावित करने वाले बुंडिबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस रोग के चल रहे प्रकोप को 'महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' भी घोषित किया है। भारत में कोई मामला नहीं भारत में बुंडिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण इबोला रोग का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और अन्य प्रभावित देशों के हालातों को देखते हुए और डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों के अनुरूप, भारत सरकार ने सभी भारतीय नागरिकों को आगे की सूचना तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-आवश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
उन भारतीय नागरिकों को जो वर्तमान में इन देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्या है इबोला वायरस? विशेषज्ञों की राय पूर्व एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार, इबोला एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है और संक्रमित शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से संक्रमण होता है। डॉ. गुलेरिया बताते हैं कि शुरुआत में मरीज को बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, गले में खराश, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं।
गंभीर स्थिति में यह रक्तस्राव, अंग फेलियर और शॉक तक पहुंच सकता है। इबोला की मृत्यु दर 50% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद खतरनाक बीमारी बन जाती है। इबोला रेस्पिरेटरी वायरस की तरह हवा से नहीं फैलता है। यह सिर्फ इन्फेक्टेड बॉडी फ्लूइड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड लगभग 2–21 दिन का होता है, इस दौरान कोई व्यक्ति इन्फेक्टेड नहीं होता है। उन्होंने बताया कि सख्त इन्फेक्शन कंट्रोल, आइसोलेशन और इन्फेक्टेड लोगों के संपर्क से बचना रोकथाम के लिए जरूरी हैं। उनका कहना है कि असरदार कंटेनमेंट उपायों की वजह से इसका आउटब्रेक ज्यादातर अफ्रीका तक ही सीमित है।
