'जानवरों वाली रोटी देते, पीट-पीटकर एक को मार डाला...', रुला देगी दो साल कैद रहे मजदूरों की कहानी
'हमने महीनों तक सब्जी देखी ही नहीं. 24 घंटे में सिर्फ एक बार तीन-चार रोटियां दी जाती थीं, वो भी सूखी, रखी हुई, जो पशुओं
'हमने महीनों तक सब्जी देखी ही नहीं. 24 घंटे में सिर्फ एक बार तीन-चार रोटियां दी जाती थीं, वो भी सूखी, रखी हुई, जो पशुओं के खाने के लिए निकाली जाती है वैसी, चारे वाले भूसी की रोटी. भूखा शरीर और 24 घंटे काम, इस पर अगर नींद आ जाए तो बेल्ट से पीटते थे.'
