कोलकाता गोदाम हादसे में मरने वालों की संख्या 11 हुई:आज 5 लोगों को रेस्क्यू किया, अभी भी कई फंसे; तलाश के लिए सेना का रडार लगाया
कोलकाता के गोदाम हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 11 हो गया है। गुरुवार को 6 और लोगों के शव मिले। इसके अलावा, अब तक
कोलकाता के गोदाम हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 11 हो गया है। गुरुवार को 6 और लोगों के शव मिले। इसके अलावा, अब तक 20 लोगों को बचाया गया है। इनमें 2 आईसीयू में है। 18 की हालत खतरे से बाहर है। हादसे के करीब 26 घंटे बाद भी सेना, NDRF, SDRF, कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, सेना और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। सेना ने इसके लिए ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) सिस्टम भी लगाया है।
प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इसकी वजह निर्माण संबंधी तकनीकी खामी या संरचनात्मक कमजोरी की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन की 7 तस्वीरें... ब्रोकर से लेकर अब तक 5 गिरफ्तार CM ने कहा- कोलकाता में सभी निर्माणाधीन इमारतों का होगा ऑडिट सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम (KMC) क्षेत्राधिकार में आने वाली सभी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराने की घोषणा की है।
सीएम ने कहा कि यह ऑडिट उन सभी प्रोजेक्ट्स का होगा, जिन्हें पिछली TMC सरकार के कार्यकाल में मंजूरी दी गई थी। सरकार के अनुसार, ऑडिट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानदंडों के अनुसार हो रहा है या नहीं। जिन प्रोजेक्ट्स में अनियमितता या सुरक्षा संबंधी खामियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। बिना छुए ही वस्तु या ढांचे की पहचान कर सकता है GPR ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो किसी वस्तु या ढांचे को छुए बगैर ही उसके नीचे मौजूद कंक्रीट, केबल, धातु, पाइप या अन्य वस्तुओं की पहचान कर सकती है।
इसकी मदद 8-10 मीटर तक की वस्तुओं का पता लगाने में ली जाती है। जीपीआर मूल रूप से 1930 के दशक में ग्लेशियर की मोटाई मापने के लिए विकसित किया गया था। बाद में जीपीआर के लिए 1960 में हार्डवेयर और 1970 में सॉफ्टवेयर विकसित हुए। अब यह टेक्नोलॉजी और भी हाईटेक हो चुकी है।