Politics: कौन हैं पूर्व आईएएस सुजाता कार्तिकेयन? जिन्होंने थामा बीजेडी का हाथ; नवीन पटनायक ने दिलाई सदस्यता
सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उनके पास ओडिशा के प्रशासन में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है।
सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उनके पास ओडिशा के प्रशासन में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनकी शिक्षा की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। वह अपने कॉलेज की टॉपर रही थीं। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मास्टर डिग्री हासिल की। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग के समय उन्हें सर्वश्रेष्ठ अधिकारी प्रशिक्षु के लिए 'अशोक बामावाले पुरस्कार' मिला था।अपने प्रशासनिक करियर में सुजाता ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
जब वह सुंदरगढ़ जिले की कलेक्टर थीं, तब उन्होंने स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल वितरण कार्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने बैंकों की मदद से यह योजना चलाई ताकि आदिवासी छात्राओं के स्कूल छोड़ने की दर कम हो सके। बाद में राज्य सरकार ने इस योजना को पूरे ओडिशा में लागू किया। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के बीच खेलों, खासकर हॉकी को बढ़ावा देने और खेल सुविधाओं को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई।साल 2006 में सुंदरगढ़ में मिड-डे मील योजना में अंडे शामिल करने का श्रेय भी सुजाता को ही जाता है। आगे चलकर राज्य सरकार ने इस पहल को बड़े स्तर पर अपनाया।
वह कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर भी बनीं। समाज कल्याण निदेशक के रूप में उन्होंने 'ममता योजना' को लागू करने में मुख्य भूमिका निभाई। यह योजना गर्भवती महिलाओं और नई माताओं की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई थी।सुजाता कार्तिकेयन को नवीन पटनायक सरकार के सबसे खास कार्यक्रम 'मिशन शक्ति' का चेहरा माना जाता है। उनके कार्यकाल में इस कार्यक्रम का बहुत विस्तार हुआ। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों को कर्ज मिलने और व्यापार करने में काफी मदद मिली। उन्होंने संस्कृति सचिव के रूप में भुवनेश्वर में पहले 'विश्व ओड़िया भाषा सम्मेलन' का सफल आयोजन भी कराया था।बीजेडी में शामिल होने के बाद सुजाता ने कहा कि वह पिछले 24 साल से नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा के लोगों की सेवा कर रही हैं।
वह खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें एक बार फिर राज्य के लिए काम करने का मौका मिला है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ और जनता के आशीर्वाद से पूरी निष्ठा के साथ काम करने का संकल्प लिया।
