जैश आतंकी से शादी करना चाहती थी जयपुर की महिला:वॉट्सएप चलाने के लिए अपने नंबर आतंकियों को दिए, नवंबर में भागने वाली थी पाकिस्तान
राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़ी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल चलाने की आरोपी बबीता (37) रोज नए खुलासे कर रही है। बबीता को जैश
राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़ी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल चलाने की आरोपी बबीता (37) रोज नए खुलासे कर रही है। बबीता को जैश का कमांडर अबू-उबैदाह लीड कर रहा था। दो साल पहले सोशल मीडिया के जरिए बबीता अबू के कॉन्टैक्ट में आई थी। बबीता ने जब खुद की परेशानी (पति से तलाक) अबू को बताई, तो वो फायदा उठा कर उससे हमदर्दी जताने लगा। अबू के ब्रेनवॉश करने के बाद वो उससे शादी तक करना चाहती थी। इसके लिए उसने नवंबर में पाकिस्तान भागने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था। इससे पहले अप्रैल 2026 में आतंकी अबू ने पाकिस्तान के एक मुफ्ती से ऑनलाइन कलमा पढ़वाकर उसे मुस्लिम बना दिया। अब बबीता से वो ‘खदीजा’ बन गई थी। अबू रोज उसे नमाज, सना, कुरान पढ़ने और अमल करने के लिए कहता था। रिपोर्ट में पढ़िए बबीता से अबतक क्या-क्या खुलासे हुए हैं? सोशल मीडिया पर सर्च किया था जैश ए मोहम्मद संगठन जयपुर के टोंक रोड स्थित बालाजी विहार, वाटिका की रहने वाली बबीता धाकड़ की शादी हिंडौनसिटी (करौली) में हुई थी। पति से अनबन के चलते तलाक का केस चल रहा है। तब से वह अपने पिता और भाई के पास रह रही थी। एटीएस की पूछताछ में बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा ने बताया कि उसने 2023-24 में जिज्ञासा वश सोशल मीडिया पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के बारे में सर्च किया था।
इस दौरान कई कमांडर उसके कॉन्टैक्ट में आए। इसी दौरान अबू-उबैदाह नाम के एक कमांडर से उसके भावनात्मक संबंध बन गए। एटीएस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आतंकी अबू-उबैदाह का नाम जम्मू-कश्मीर के आतंकी हमले में भी सामने आ चुका है। आतंकी खुद को धर्म के लिए जंग लड़ने वाला जांबाज सिपाही बताता था। इसके चलते बबीता उसे बहादुर समझने लगी और झांसे में आ गई। बबीता ने एटीएस को बताया कि उसकी जैश-ए-मोहम्मद संगठन में रूचि बढ़ गई थी। उसे मुजाहिदों का मकसद पसंद आने लगा था। यही कारण है कि वो सोशल मीडिया पर जैश-ए-मोहम्मद की हथियारों के साथ पोस्ट व रील देखती थी। यहां तक कि इस आतंकी संगठन से जुड़ी कई महिलाएं (सुसाइड बॉम्बर) भी उसके संपर्क में थीं। वो रोज उसे संगठन से जुड़ने के फायदे और अपना मकसद बताकर ब्रेन वॉश करती थीं। मुस्लिम धर्म कबूला, पाकिस्तान जाने की थी प्लानिंग पूछताछ में बबीता ने स्वीकार किया कि आतंकियों की बातों का उसके दिल में गहरा असर होता था। इसी कारण उसने बिना किसी संकोच के मुस्लिम धर्म कबूल कर लिया था। जल्द ही संगठन के लोग उसे पाकिस्तान बुलाकर जैश-ए-मोहम्मद संगठन में टास्क देने वाले थे। बबीता ने बताया कि वह खुद भी अबू उबैदाह से मिलने के लिए पाकिस्तान जाना चाहती थी। आतंकी संगठन के एक बड़े लीडर ने भी बबीता से बात की थी।
उसने उससे पासपोर्ट के बारे में पूछा, तो बबीता ने बताया कि उसके पास पासपोर्ट नहीं है। फिर उसी लीडर के कहने पर बबीता ने पासपोर्ट बनाने के ऑनलाइन तरीके सर्च किए थे। बबीता पाकिस्तान के एक मुफ्ती के भी संपर्क में थी, जिसने उसे ऑनलाइन कलमा पढ़ाकर मुसलमान बनाया था। उससे बबीता ने पाकिस्तान जाने का पूरा रोड मैप और पैसों के खर्च के बारे में पूछा था। नवंबर में था भागने का प्लान अबू ने बबीता को बताया था कि उसे पहले नेपाल जाना होगा। नेपाल से सउदी अरब या यूएई जाएगी। वहां से उसे पाकिस्तान पहुंचाया जाएगा। इस पूरे सफर में खर्च करने के लिए उसे क्रिप्टो करेंसी दी जाएगी। बबीता ने बताया कि उसने अबू की बताई क्रिप्टो करेंसी की एक एप्लीकेशन भी डाउनलोड कर ली थी। ताकि पाकिस्तान भागने से पहले उसे चलाना सीख ले। इसके बाद इसी साल नवंबर से जनवरी के बीच उसका भागने का प्लान था। बबीता के मोबाइल नंबरों पर आतंकी चलाता था वॉट्सएप जैश का कमांडर बताने वाले अबू से बातचीत में बबीता इतनी प्रभावित हो गई थी कि उसने अपने तीन भारतीय नंबरों से वॉट्सएप चलाने के लिए उसे OTP बता दिए थे। अबू-उबैदाह ने उसे बताया था कि इसमें से एक नंबर वो खुद इस्तेमाल करेगा। वहीं, दो नंबर संगठन से जुड़े अन्य भारतीय सदस्यों को देगा। भारतीय मोबाइल नंबर से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर वह एजेंसियों की रडार से बच जाएंगे।