यूनिसेफ की रिपोर्ट: दो या अधिक जलवायु खतरों की जद में भारत के 97% बच्चे, स्वास्थ्य-पोषण पर खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़, उष्णकटिबंधीय तूफान और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियां बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर असर डाल
रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़, उष्णकटिबंधीय तूफान और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियां बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर असर डाल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 41.16 करोड़ बच्चे कम से कम दो जलवायु संबंधी खतरों से प्रभावित हैं। इनमें सूखा, नदियों और तटीय क्षेत्रों में बाढ़, उष्णकटिबंधीय तूफान, लू, अत्यधिक गर्मी, जंगल की आग और धूल भरी आंधियां शामिल हैं।इनमें से 23.4 करोड़ से अधिक बच्चे, जो देश की कुल बाल आबादी का लगभग 55 प्रतिशत हैं, कम से कम तीन जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं।
यूनिसेफ का कहना है कि कई बच्चों के लिए ये खतरे अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ मौजूद हैं, जिससे उनके जीवन और विकास पर कई स्तरों पर असर पड़ता है।रिपोर्ट बताती है कि सूखा और अत्यधिक गर्मी भारत में बच्चों के लिए सबसे व्यापक जलवायु जोखिम हैं। करीब 15.88 करोड़ बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां ये दोनों खतरे मौजूद हैं। वहीं 8.41 करोड़ बच्चे ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां उष्णकटिबंधीय तूफान, सूखा और अत्यधिक गर्मी तीनों का खतरा है।
इसके अलावा 3.85 करोड़ बच्चे नदियों में बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी के संयुक्त जोखिम वाले क्षेत्रों में रहते हैं।यूनिसेफ के मुताबिक सूखा भारत में बच्चों को प्रभावित करने वाला सबसे व्यापक जलवायु खतरा है। देश के 96 प्रतिशत से अधिक बच्चे, यानी लगभग 41.02 करोड़ बच्चे, ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां सूखे की आशंका बनी रहती है। सूखे का असर केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, पोषण और परिवारों की आजीविका को भी प्रभावित करता है।
इसके परिणामस्वरूप बच्चों में कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
