'संविधान की रक्षा करें': बागी सांसदों पर उद्धव गुट ने ओम बिरला से की बड़ी मांग, कांग्रेस ने भी साधा निशाना
क्या लोकसभा अध्यक्ष से क्या मांग की गई? क्या कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया? संजय दीना पाटिल और उद्धव गुट के बीच क्यों
क्या लोकसभा अध्यक्ष से क्या मांग की गई? क्या कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया? संजय दीना पाटिल और उद्धव गुट के बीच क्यों बढ़ा विवाद? क्या छह सांसदों को सुरक्षा मिलने से विवाद और बढ़ा? उद्धव गुट के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद कहा कि उनकी पार्टी के छह सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वह और अनिल देसाई पहले भी इस मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से मिल चुके हैं। सावंत ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया है कि यदि इस मामले में कोई पत्र या दावा आता है तो फैसला लेने से पहले उनकी बात जरूर सुनी जाए।अरविंद सावंत ने कहा कि हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि संविधान की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।
यदि कोई सांसद व्यक्तिगत या समूह के रूप में पार्टी छोड़ने की बात करता है तो कोई भी निर्णय लेने से पहले हमें सुनना चाहिए। सावंत ने बताया कि ओम बिरला ने उन्हें बताया कि अभी तक इस संबंध में उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है और सांसदों की खरीद-फरोख्त की जा रही है। शमा मोहम्मद ने कहा कि यदि शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसद दूसरी पार्टी में जाना चाहते हैं तो उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर नए चुनाव लड़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक चुनाव चिन्ह पर जीतकर दूसरे दल में शामिल होना जनता के जनादेश का अपमान है।शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता सुषमा अंधारे ने बागी सांसद संजय दीना पाटिल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वाई प्लस सुरक्षा मिलने के बाद उनमें अहंकार आ गया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को पाटिल की क्षमताओं के बारे में पूरी जानकारी है। यह बयान उस समय आया है जब संजय राउत और संजय दीना पाटिल के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। शिंदे गुट में शामिल होने के बाद पाटिल ने दावा किया था कि उनके पिता पर हमले के बाद उन्होंने पांच लोगों को मार गिराया था, हालांकि उन्होंने इस घटना का कोई विवरण नहीं दिया।उद्धव गुट का आरोप है कि शिंदे गुट में शामिल होने से पहले ही छह बागी सांसदों को वाई प्लस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों को बल मिला है। वहीं, शिंदे गुट लगातार दावा कर रहा है कि सांसद विकास कार्यों और नेतृत्व शैली से असंतुष्ट होकर उनके साथ आए हैं।
इन घटनाओं के बाद दोनों गुटों के बीच बालासाहेब ठाकरे की विरासत को लेकर संघर्ष और तेज हो गया है।
