फर्जी कोर्ट ऑर्डर दिखाकर जेल से भागा उम्रकैद की सजा काट रहा दोषी, 8 साल बाद खुला राज
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में करीब आठ साल पहले हुई एक संदिग्ध रिहाई का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन और पुलिस हैरान हैं। आरोप है कि एक उम्रकैद कैदी ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश का इस्तेमाल कर जेल से रिहाई हासिल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में करीब आठ साल पहले हुई एक संदिग्ध रिहाई का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन और पुलिस हैरान हैं। आरोप है कि एक उम्रकैद कैदी ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश का इस्तेमाल कर जेल से रिहाई हासिल कर ली थी। अब जेल प्रशासन ने दोषी और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शंकर ए नामक कैदी को वर्ष 2001 के फिरौती के लिए अपहरण मामले में दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 364ए (फिरौती के लिए अपहरण) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दो-दो उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया था। साथ ही प्रत्येक धारा के तहत पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जेल अधिकारियों के अनुसार, तीन दिसंबर 2018 को उन्हें एक पत्र मिला था, जिसे उस समय सुप्रीम कोर्ट का आदेश माना गया। यह आदेश एक आपराधिक अपील से जुड़ा बताया गया था।
इसी कथित आदेश के आधार पर शंकर ने कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना जमा किया और 13 नवंबर 2018 को उसे जेल से रिहा कर दिया गया। फर्जी दस्तावेज से रिहाई का खुलासा कई साल बाद शिकायतें सामने आईं कि शंकर ने फर्जी अदालत दस्तावेज जमा कर अपनी रिहाई कराई थी। इसके बाद कर्नाटक के महानिदेशक, जेल एवं सुधार सेवाओं के निर्देश पर आंतरिक जांच शुरू की गई। मामले से जुड़े रिकॉर्ड बेंगलुरु दक्षिण रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंपे गए।
खबरें और भी जांच के दौरान जेल विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार से आदेश की सत्यता की पुष्टि कराई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बताया गया कि तीन नवंबर 2018 का कथित आदेश पूरी तरह फर्जी था। इसके बाद जेल अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। जेल प्रशासन का कहना है कि शंकर को फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उन्हें जमा कराने में कई लोगों ने मदद की हो सकती है।
-1779612672833_m.webp)