एशिया पर मंडराया महा-संकट! पैरों तले खिसक जाएगी जमीन
कहीं अचानक से पिघलते ग्लेशियर, कहीं पर सूखे की मार झेलते लोग, कहीं पर गर्मी की तपन से झुलसते लोग, तो कहीं सैलाब का ऐसा
कहीं अचानक से पिघलते ग्लेशियर, कहीं पर सूखे की मार झेलते लोग, कहीं पर गर्मी की तपन से झुलसते लोग, तो कहीं सैलाब का ऐसा तांडव है कि यह अपने साथ सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा है। इसी मौसम के बदलते मिजाज से भारत भी अछूता नहीं है। पहाड़ से लेकर मैदान तक बर्फीले इलाकों से लेकर नदियों और समंदर के इलाकों तक हर तरफ मौसम अपनी बेरुखी दिखा रहा है। भारत पर इसका क्या असर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में यह और कितना असर डालेगा बताएंगे आपको। लेकिन उससे पहले जरा इन तस्वीरों को देखिए। यह तस्वीरें बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन का सबसे क्रूर और भयानक चेहरा अब दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले महाद्वीप यानी एशिया के सामने आ चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है। जिसे देखने के बाद आम आदमी से लेकर विश्व के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के पैरों तले जमीन खिसक गई है।
17 जून को दुनिया के सामने आई रिपोर्ट ने ऐसा खौफनाक खुलासा किया जिसने भारत जैसे एशियाई देशों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि साल 1991 से 2025 के बीच एशिया में तापमान वृद्धि की दर साल 1961 से 1990 की अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी दर्ज की गई है। इस बेकाबू तपिश के कारण ही पिछला साल यानी 2025 एशिया के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म साल साबित हुआ। जो गर्मी बढ़ी और औसतन तापक्रम जब ग्लोब का बढ़ गया तो समुद्र तपने लगे और ये समुद्रों की तपस्वी है जिसमें कारण आज उमस बढ़ चुकी है। और फिर देखिए कि जो वेस्टर्न डिस्टरबेंस जो दिसंबर के आसपास आता है वो दो-ती महीने आगे चला गया। मतलब उसने मानसून की उस रफ्तार को धीमे कर दिया जो तापक्रम के अंतर के कारण आती थी। दुनिया के कई मौसम वैज्ञानिक इसे सिर्फ मौसम और जलवायु से जुड़ा आंकड़ा नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी मान रहे हैं जो अगले कुछ सालों में आने वाली है या यूं कहें कि इसने एशिया के देशों में दस्तक दे दी है और धीरे-धीरे इसका असर बढ़ने वाला है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब विनाशकारी रूप ले रहे हैं। जिसकी वजह से अब पहाड़ी इलाकों में झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है। तो कई पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। जिसकी वजह से लोग काफी परेशान हैं। और अगर ऐसा चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के कई देश मौसम के बदलते मिजाज से त्राह त्राहि करते नजर आएंगे। देश की आवाम खानेपीने की समस्याओं से जूझने लगेगी क्योंकि रिपोर्ट में जो दावा किया गया वह किसी चेतावनी से कम नहीं है। पिछले कुछ दशकों में एशिया दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल हो गया है जहां जलवायु परिवर्तन का सबसे तेज असर दिख रहा है। मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत की तुलना में एशिया का तापमान कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। About Channel ज़ी न्यूज़ देश का सबसे भरोसेमंद हिंदी न्यूज़ चैनल है।
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