Operation Sindoor: राफेल विमानों का बेड़ा पूरी तरह सक्रिय, वायुसेना के टेंडर ने खोली PAK के फर्जी दावों की पोल
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के कई राफेल लड़ाकू विमान मार गिराने के पाकिस्तान के फर्जी दावों की एक बार फिर से पोल खुल गई
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के कई राफेल लड़ाकू विमान मार गिराने के पाकिस्तान के फर्जी दावों की एक बार फिर से पोल खुल गई है। भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के एक आधिकारिक दस्तावेज में मौजूदा सभी 36 राफेल विमानों के लिए ब्रिज सपोर्ट मांगा गया है, जिससे पाकिस्तान के फर्जी दावे बेनकाब हो गए हैं। साल 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता हुआ था। भारतीय वायुसेना को सभी 36 राफेल की डिलीवरी भी समय से पूरी हो गई थी। मेन कॉन्ट्रैक्ट के तहत पांच साल के लिए परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक (पीबीएल) सपोर्ट भी शामिल था। बाद में साल 2021 में इस व्यवस्था को अगले पांच साल के लिए बढ़ाया गया।
यह कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2026 के आखिर में खत्म हो रहा है।नए लांग टर्म लॉजिस्टिक सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) से मंजूरी मिलने के बाद इस पर आगे कार्रवाई होगी। इसी बीच, अंतरिम व्यवस्था के तौर पर परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए एक ब्रिज सपोर्ट आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी किया गया है।रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह आरएफपी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर जारी किया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें 23 सितंबर 2016 के भारत-फ्रांस समझौते के तहत डसॉल्ट एविएशन से खरीदा गया था। कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार विमानों के साथ उनके संचालन के लिए जरूरी उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, उपभोग्य सामग्री और पांच वर्षों तक रखरखाव सहायता उपलब्ध कराई गई थी।
यह व्यवस्था प्रति विमान औसतन 150 उड़ान घंटे प्रतिवर्ष के आधार पर तैयार की गई थी। इसमें ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट (जीएसई) और ग्राउंड हैंडलिंग इक्विपमेंट (जीएचई) के रखरखाव के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स भी शामिल थे।मौजूदा पीबीएल व्यवस्था 18 सितंबर 2026 को खत्म हो रही है। इसके बाद अगले पांच महीनों तक राफेल बेड़े के बिना किसी दिक्कत के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 'ब्रिज सपोर्ट' कांट्रेक्ट का प्रस्ताव मांगा गया है। यह ब्रिज सपोर्ट 36 राफेल विमानों के संचालन के लिए होगी, जिसमें हर फाइटर जेट सालाना 150 उड़ान घंटे के मानक के अनुसार उड़ान भरेगा। पांच महीनों की समयसीमा के लिए कुल अनुमानित उड़ान समय लगभग 2,250 घंटे है।इस आरएफपी का यह मतलब नहीं है कि राफेल जेट सेवा से बाहर हैं या उनकी उपलब्धता में कोई बड़ी समस्या है।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के आरएफपी को राफेल बेड़े की उपलब्धता, ऑपरेशनल क्षमता, या रखरखाव संबंधी किसी समस्या के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह पूरी तरह एक नियमित और अंतरिम लॉजिस्टिक व्यवस्था है, ताकि नए लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट के लागू होने तक राफेल बेड़े का ऑपरेशन बिना किसी दिक्कत के जारी रह सके। ब्रिज सपोर्ट का प्रस्ताव फ्रांस की इंजन निर्माता कंपनी सैफरान विमान इंजन को जारी किया गया है। यह कंपनी राफेल इकोसिस्टम से जुड़ी प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) कंपनियों में से एक है।
