'ममता ही तृणमूल': AITC अध्यक्ष की नियुक्ति पर मोइत्रा ने साधा निशाना, कहा- फिर लड़े चुनाव, ताकत पला चल जाएगी
अरूप रॉय की नियुक्ति पर महुआ ने क्या उठाए सवाल? क्या भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों पर भी बोलीं महुआ? गिरफ्तारियों को लेकर क्या आरोप लगाए?
अरूप रॉय की नियुक्ति पर महुआ ने क्या उठाए सवाल? क्या भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों पर भी बोलीं महुआ? गिरफ्तारियों को लेकर क्या आरोप लगाए? महुआ मोइत्रा ने कहा कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है और पार्टी के सभी विधायक तथा सांसद उनके नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कुछ भी दावा कर सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक हकीकत नहीं बदलती। महुआ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई भी खुद को कुछ भी घोषित कर सकता है, लेकिन जनता का फैसला सबसे अहम होता है। उन्होंने कहा कि अगर 65 विधायक अपनी ताकत साबित करना चाहते हैं तो वे इस्तीफा दें, पार्टी का नया नाम रखें और फिर चुनाव मैदान में उतरें।अरूप रॉय को एआईटीसी का चेयरपर्सन बनाए जाने की खबरों पर महुआ मोइत्रा ने इसे "थिएटर ऑफ द एब्सर्ड" यानी बेतुके नाटक जैसा बताया।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन हैं और वही पार्टी की पहचान हैं। महुआ ने कहा कि पार्टी का हर जनप्रतिनिधि ममता बनर्जी के नाम और उनके नेतृत्व की वजह से निर्वाचित हुआ है। ऐसे में किसी दूसरे नेतृत्व का दावा राजनीतिक रूप से टिकाऊ नहीं है।महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी पहली बार 2011 में सत्ता में आई थीं, तब उन्होंने 'बदला नहीं, बदलाव चाहिए' का नारा दिया था। महुआ का आरोप है कि 2021 के बाद केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र सरकार के पास सीबीआई और अन्य एजेंसियों का नियंत्रण था, लेकिन बहुत कम मामलों में दोष सिद्ध हो सका।तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया कि चार मई के बाद से ऐसा कोई दिन नहीं गया, जब किसी तृणमूल नेता या मंत्री को गिरफ्तार नहीं किया गया हो।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना अदालत की प्रक्रिया पूरी किए सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं किया जा सकता। महुआ ने कहा कि कानून का पालन अदालतों के जरिए होना चाहिए और किसी भी कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।महुआ मोइत्रा के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब पश्चिम
बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं और विपक्ष के आरोपों के बीच महुआ के बयान को तृणमूल नेतृत्व के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकता है।
