कनिष्क बमकांड की 41वीं बरसी: जयशंकर ने दी पीड़ितों को श्रद्धांजलि, आतंकवाद के खिलाफ भारत का संकल्प दोहराया
इतिहास का यह काला पन्ना बेहद दर्दनाक है। तारीख 23 जून 1985 थी। बोइंग 747 विमान आसमान में उड़ान भर रहा था।
इतिहास का यह काला पन्ना बेहद दर्दनाक है। तारीख 23 जून 1985 थी। बोइंग 747 विमान आसमान में उड़ान भर रहा था। अचानक 9,400 मीटर की ऊंचाई पर एक भयानक धमाका हुआ। बम के इस भीषण विस्फोट ने पूरे विमान के परखच्चे उड़ा दिए। विमान उस समय आयरिश हवाई क्षेत्र में था। धमाके के बाद विमान सीधे अटलांटिक महासागर में जा गिरा। इस भयावह आतंकी घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
इतने मासूम लोगों की अनमोल जिंदगी एक पल में खत्म हो गई।इस विमान हादसे ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। फ्लाइट एआई 182 मॉन्ट्रियल-लंदन-दिल्ली मार्ग पर संचालित हो रही थी। यह हवाई त्रासदी इतनी बड़ी थी कि इसका दर्द आज भी महसूस होता है। 40 साल से भी अधिक समय पहले हुई इस दुखद घटना का दर्द आज भी तीन देश साझा करते हैं।
भारत, कनाडा और आयरलैंड आज भी इस हवाई त्रासदी के गहरे दुख को मिलकर साझा करते हैं। पूरी दुनिया को स्तब्ध कर देने वाली इस घटना को आज भी सबसे बड़े विमान आतंकी हमलों में गिना जाता है।विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने पोस्ट में इस घटना की कड़वी यादों को साझा किया। उन्होंने लिखा कि आज एयर इंडिया 182 'कनिष्क' बमबारी की 41वीं बरसी है। हम इस भीषण आतंकवादी घटना में अपनी अनमोल जान गंवाने वाले सभी मासूमों की स्मृति को नमन करते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
