Lucknow, India

भारत की प्रजनन दर में गिरावट, बिहार-यूपी समेत 6 राज्यों को छोड़ सभी State में गिरा ग्राफ

Published 24 May 2026 · india

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की कुल प्रजनन दर (एक महिला के औसतन कितने बच्चे होंगे) 2.1 से घटकर 1.9 हो गई है। इस बात की जानकारी 2024 की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट में मिली है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों को

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की कुल प्रजनन दर (एक महिला के औसतन कितने बच्चे होंगे) 2.1 से घटकर 1.9 हो गई है। इस बात की जानकारी 2024 की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट में मिली है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में टीएफआर 'रिप्लेसमेंट लेवल' (बदलाव के स्तर) से नीचे गिर गया है। दिल्ली (1.2) में यह सबसे कम है, जिसके बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। यहां टीएफआर 1.3 है। जनसंख्या की कमी का खतरा जब टीएफआर 2.1 होता है तो इसे 'रिप्लेसमेंट लेवल' कहा जाता है, क्योंकि अपने जीवनकाल में लगभग 2.1 बच्चों को जन्म देने वाली महिला औसतन अपनी और अपने जीवनसाथी की जगह ले लेती है।

जब प्रजनन दर लंबे समय तक इस स्तर से नीचे बनी रहती है तो जनसंख्या वृद्धि धीमी हो जाती है और आखिरकार नकारात्मक भी हो सकती है। रिपोर्ट से पहले के एक दशक में हुए प्रतिशत बदलाव पर नजर डालने से पता चलता है कि बिहार में टीएफआर में सबसे कम कमी आई है। 2012-14 के 3.2 टीएफआर से 2022-24 में 2.9 तक महज 9.4% की कमी है। प्रजनन दर में गिरावट के बावजूद कामकाजी उम्र की आबादी बढ़ रही है। दिल्ली और तमिलनाडु में कम तो छत्तीसगढ़ असम में ज्यादा छत्तीसगढ़ और असम भी दो ऐसे राज्य हैं जहां टीएफआर (कुल प्रजनन दर) ज्यादा है और इसमें क्रमशः 11.5% और 13% की अपेक्षाकृत कम गिरावट देखी गई है। वहीं, दिल्ली और तमिलनाडु में टीएफआर पहले से ही बहुत कम (1.7) था वहां क्रमशः 29.4% और 23.5% की गिरावट आई।

जिन राज्यों में किसी महिला द्वारा जन्म दिए गए बच्चों की औसत संख्या एक दशक से भी पहले ही 'रिप्लेसमेंट लेवल' (जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए जरूरी स्तर) से नीचे गिर गई थी, वहां की कुल आबादी में 0-14 आयु वर्ग का अनुपात भी सबसे कम है। खबरें और भी तमिलनाडु में 0-14 आयु वर्ग की आबादी कुल आबादी का सिर्फ 18% है, जबकि बिहार में यह 31.5% है। आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में यह अनुपात लगभग 19% है। भारत में हर चार में से लगभग एक व्यक्ति (24%) 0-14 आयु वर्ग का है। बढ़ रही भारत की कामकाजी उम्र वाली आबादी भारत की कामकाजी उम्र वाली आबादी (15-59 वर्ष) उन राज्यों में भी बढ़ रही है जहां प्रजनन दर बहुत कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के लिए 'डेमोग्राफिक विंडो' (जनसांख्यिकीय अवसर) अभी बंद नहीं हुआ है।

15-60 वर्ष का आयु वर्ग भारत की कुल आबादी का 66.4% है (जो 2014 के 64% से बढ़ा है), जबकि आश्रित आबादी (0-14 वर्ष) 24% और 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोग 10% से भी कम हैं। हालाँकि, उम्मीद है कि यह भी जल्द ही खत्म हो जाएगी क्योंकि काम करने लायक आबादी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। जैसा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में देखा जा सकता है, जहां इस रिपोर्ट से पिछले दशक में काम करने लायक आबादी का अनुपात महज 0.6 प्रतिशत अंक ही बढ़ा है यानी 67.2% से बढ़कर 67.8% हुआ है।

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