तृणमूल कांग्रेस दो फाड़: ममता बनर्जी ने खुद को TMC चीफ बताया, EC को सौंपी सूची; बागी गुट का अध्यक्ष अलग
तृणमूल कांग्रेस दो फाड़ होने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास कितनी ताकत बची है? पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विपक्ष को लेकर
तृणमूल कांग्रेस दो फाड़ होने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास कितनी ताकत बची है? पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विपक्ष को लेकर ये सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के पास जो दस्तावेज / सूची जमा कराई है, इसमें उन्होंने खुद को पार्टी का अध्यक्ष बताया है। दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अपनी राहें अलग करने वाले बागी गुट ने अलग अध्यक्ष की घोषणा की है। ऐसे में अब सबसे रोचक सवाल ये है कि तृणमूल कांग्रेस की कमान कौन संभालेगा? दरअसल, बागी विधायकों ने ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पार्टी पदाधिकारियों की एक सूची सौंपी। इस सूची में उन्होंने खुद को तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष दिखाया है।इससे पहले सोमवार को, विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप रॉय को नया पार्टी अध्यक्ष घोषित किया। उन्होंने ममता बनर्जी से संरक्षक की भूमिका निभाने का आग्रह किया। ममता बनर्जी द्वारा 20 जून, शनिवार तक की स्थिति के अनुसार पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्यों की सूची साझा की गई। इस सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष, सुब्रत बख्शी उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव हैं।
डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेना संयुक्त सचिव जबकि सुभाशीष चक्रवर्ती कोषाध्यक्ष हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति की जानकारी दी।ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप रॉय को नया तृणमूल कांग्रेस प्रमुख घोषित किया था। उन्होंने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति का भी एलान किया। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि अरूप रॉय को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया है। इस समिति में फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन और ऋतब्रत बनर्जी सहित 29 अन्य सदस्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे ममता बनर्जी को संरक्षक के रूप में देखना चाहते हैं।तृणमूल कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष और सबीना यास्मीन शामिल हैं। उन पर जानबूझकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। पार्टी फंड, अध्यक्ष का पद और चुनाव चिह्न अब दोनों गुटों के बीच विवाद के मुख्य मुद्दे बन गए हैं। बागी गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाया है।
