Re-neet; Aiims से PMCH तक के छात्र बने सॉल्वर:6 राज्यों के मेडिकल कॉलेज से हायर किए स्टूडेंट, 15-20 लाख का ऑफर, जानिए टारगेट पर कौन
AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों से MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र बिहार के लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थी के रूप में पकड़े
AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों से MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र बिहार के लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थी के रूप में पकड़े गए हैं। जालसाजों ने 40 लाख रुपए में डॉक्टर बनाने का ठेका लिया था। इसका काम असली परीक्षार्थी की जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाना है। गैंग कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इससे लगता है कि लखीसराय के तीन सेंटर (हसनपुर हाई स्कूल, केआरके हायर सेकंडरी और केंद्रीय विद्यालय) से 9 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए हैं। इस फर्जीवाड़े का मुख्य किरदार PMCH का छात्र है। पकड़े जाने पर इसने पुलिस को अपना नाम मयंक कश्यप बताया था। जांच में पता चला कि इसका असली नाम अश्विनी कुमार है। यह बायोमेट्रिक कर्मी बनकर परीक्षा केंद्र में घुसा था। अंदर बैठ परीक्षार्थियों की मदद कर रहा था। मूल रूप से हाजीपुर का रहने वाला है। यह PMCH के 2022 बैच के थर्ड ईयर का MBBS छात्र है। जांच में पता चला है कि इसने मयंक कश्यप के नाम से सिम कार्ड ले रखा था। वहीं, झारखंड 12वीं की टॉपर पूनम कुमारी भी शामिल है। गिरिडीह की रहने वाली है। पूनम ने 2021 में जैक बोर्ड से साइंस स्ट्रीम में झारखंड में टॉप किया था। 12वीं की पढ़ाई रांची से की थी। Re-NEET-UG 2026 की परीक्षा में कैसे गड़बड़ी की कोशिश की गई? सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षार्थी की पहचान के हाईटेक इंतजाम को कैसे बाईपास किया गया? पढ़िए रिपोर्ट..। सबसे पहले जानिए जालसाजों ने क्या किया? NEET-UG 2026 की परीक्षा पास कराने के लिए परीक्षार्थियों से डील की। टारगेट पर हाईप्रोफाइल परिवारों के बच्चे थे। इनसे 40 लाख रुपए में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने का वादा किया। एडवांस में पैसे भी ले लिए। पैसे लेकर उनकी जगह फर्जी परीक्षार्थी को बैठाया। इसके लिए, मध्य प्रदेश, यूपी, दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल तक में पढ़ रहे मेडिकल के छात्रों को हायर किया। गिरोह की नजर ऐसे मेडिकल स्टूडेंट पर रहती है, जिन्हें पैसे की सख्त जरूरत है। इन छात्रों को 15-20 लाख रुपए तक ऑफर किए। ऐसे व्यक्ति को सॉल्वर कहते हैं। इसका काम दूसरे की जगह परीक्षा देना है। गिरोह ने जिन सॉल्वर को चुना वे एक दूसरे को जानते तक नहीं थे। जांच में पता चला कि सॉल्वर गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने की कोशिश की। यह भी सामने आया है कि NTA ने RE-NEET परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन का ठेका EDCIL को दिया था। EDCIL ने यह काम ‘इनोवेटिव व्यू’ कंपनी को सौंप दिया। झारखंड और तमिलनाडु सरकार ने 2025 में और यूपी सरकार ने 2022 में ‘इनोवेटिव व्यू’ को बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि कंपनी के कर्मियों का नेटवर्क किन राज्यों में है।
वहीं, लखीसराय के कवैया थाने में दर्ज दो केस और क्यूल थाने में दर्ज एक केस की जांच आर्थिक अपराध इकाई करेगी। अब जानिए कैसे हुआ जालसाजों का पर्दाफाश? हसनपुर हाई स्कूल के प्रिंसिपल मृत्युंजय कुमार ने पुलिस को दिए आवेदन में कहा, 'परीक्षा शुरू होने से पहले ही मुझे करीब 12:30 बजे सूचना मिली कि मेरे परीक्षा केन्द्र हसनपुर हाई स्कूल में 14:00 बजे से 17:15 बजे तक होने वाले NEET परीक्षा 2026 में गड़बड़ी होने वाली है। असली परीक्षार्थी की जगह पर दूसरा व्यक्ति परीक्षा देने आने वाला है।' ‘मैंने इस बात की सूचना परीक्षा केन्द्र की मजिस्ट्रेट प्राची कुमारी को दिया। इसके बाद जांच के लिए सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी को बुलाया गया। मेरे साथ प्राची कुमारी और पुलिस निरीक्षक विजय कुमार ने परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर रहे परीक्षार्थी की जांच की। बारी-बारी से सभी के प्रवेश पत्र और आधार कार्ड का भौतिक रूप से वेरिफिकेशन किया।’ 'इसी दौरान एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया गया। उसने अपना नाम मंतोष कुमार बताया। वह न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में चौथे वर्ष का छात्र है। पूछताछ करने पर मंतोष ने बताया कि वह संजीत कुमार की जगह परीक्षा देने नालंदा के रंजीत कुमार एवं संजीत कुमार के साथ आया था। दोनों परीक्षा केंद्र के बाहर हैं। इसके बाद पुलिस ने रंजीत कुमार एवं संजीत कुमार को परीक्षा केंद्र से बाहर से गिरफ्तार कर लिया।' परीक्षा के बाद पैसे देने वाला था रवि मृत्युंजय के आवेदन के अनुसार पूछताछ में मंतोष कुमार ने बताया कि उसे BMIMS पावापुरी, नालंदा में पढ़ने वाले मेडिकल के छात्र रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट ने संजीत की जगह परीक्षा देने के लिए कहा था। इसके बदले पैसा देने वाला था। रविशंकर ने परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश पत्र दिया। बायोमेट्रिक कर्मी की मदद से फिंगरप्रिंट नहीं मिलने के बाद भी फर्जी तरीके से मुझे परीक्षा केन्द्र के अंदर प्रवेश करा दिया गया। रंजीत कुमार बोला- पैसे लेकर स्कॉलर बैठाते हैं पूछताछ करने पर रंजीत कुमार ने बताया कि रविशंकर मेरा दोस्त है। हम दोनों एक ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं। दोनों मिल कर परीक्षार्थी से पैसा ले कर स्कॉलर बैठाते हैं। रविशंकर ने हसनपुर हाईस्कूल में बायोमेट्रिक के काम देखने वाले प्रमोद कुमार यादव से सांठगांठ की थी। परीक्षा केंद्र पर फर्जी परीक्षार्थी को प्रवेश दिलाने में 6 बायोमेट्रिक कर्मी (बादल कुमार (सुपरवाइजर), कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुन्द कुमार, उदय कुमार और अखिलेश कुमार) ने मदद की। बादल कुमार ने पूछताछ करने पर बताया कि प्रमोद कुमार ने उसे हसनपुर हाई स्कूल में बायोमेट्रिक कर्मी के रूप में रखवाया था। कहा था कि फर्जी परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने में मदद करनी है।