Bidadi Project: क्यों विवादों में है कर्नाटक की बिदादी परियोजना? जो बदल सकती है बंगलूरू की तस्वीर
इस प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और कर्नाटक सरकार को इसे लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जेडीएस
इस प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और कर्नाटक सरकार को इसे लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जेडीएस पार्टी द्वारा इस परियोजना का भारी विरोध किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री और जेडीएस प्रमुख एचडी कुमारस्वामी ने तो सीएम डीके शिवकुमार को बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दे डाली है। इस पर सीएम शिवकुमार ने कुमारस्वामी को विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में औपचारिक चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। शिवकुमार ने सोमवार को कुमारस्वामी को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा करने का न्योता दिया।
केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में शिवकुमार ने कहा, 'मैं आपके कार्यकाल में शुरू हुए बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर आपसे चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं। मैं आपको और आपकी टीम के पांच सदस्यों को 26 जून को सुबह 11 बजे विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में विस्तार से चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूं।' इससे पहले, भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने दावा किया था कि किसान इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि शिवकुमार को इस बात पर सार्वजनिक बहस के लिए आना चाहिए कि क्या किसान इस प्रोजेक्ट से सहमत हैं।
उन्होंने कहा कि जब भी शिवकुमार तैयार हों, वे उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भले ही उपमुख्यमंत्री आधी रात तक व्यस्त रहते हों, लेकिन उन्होंने खुद उनसे इस मुद्दे के लिए कुछ समय निकालने को कहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक पिछले 450 दिनों से धरना दे रहे हैं और सुझाव दिया कि वे वहां भी जा सकते हैं।यह आरोप लगाते हुए कि इस प्रोजेक्ट से जनता को कोई फायदा नहीं होगा, कुमारस्वामी ने दावा किया कि इससे शिवकुमार की जेब भरने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।
उन्होंने प्रोजेक्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे के सभी पहलुओं की जांच के लिए एक कानूनी टीम बनाई गई है और अगले दो-तीन दिनों में वे सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने माना कि टाउनशिप का प्रस्ताव उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही आया था, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह शुरुआती चरण से आगे कभी नहीं बढ़ पाया।
