'370 रुपये बिरयानी' विवाद: राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्रणीत-हिमांशु की माफी ठुकराई, अगली सुनवाई की तारीख तय
एक सूत्र ने कहा, "सुनवाई के दौरान तीनों ने माफी मांगी, लेकिन आयोग ने उनकी माफी स्वीकार नहीं की।" सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष
एक सूत्र ने कहा, "सुनवाई के दौरान तीनों ने माफी मांगी, लेकिन आयोग ने उनकी माफी स्वीकार नहीं की।" सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर ने इस तरह की अपमानजनक सामग्री को कॉमेडी के नाम पर बढ़ावा दिए जाने और सामान्य बनाए जाने पर गहरी पीड़ा और चिंता व्यक्त की।उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आयोग रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन करता है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता के उल्लंघन को सामान्य बनाना या बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों को मनोरंजन का विषय बनाना नहीं है।
एनसीडब्ल्यू ने महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कथित टिप्पणियों के संबंध में प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया था।आयोग ने एक अलग मामले में स्टैंड-अप प्रस्तुति के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर मधुर विरली को भी समन जारी किया था। विवाद की शुरुआत प्रणीत मोरे के एक क्राउड-वर्क शो के दौरान हुई थी। उस दौरान हिमांशु जांगड़ा ने बताया था कि वह एक महिला को डेट पर ले गया था और उस पर 370 रुपये की चिकन बिरयानी का खर्च किया था।उसने कहा था कि जब महिला ने उसे घर छोड़ने के लिए कहा, तो बदले में उसे अंतरंगता की उम्मीद थी।
इस पर प्रणीत मोरे हंस पड़े थे। दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अपमानजनक और बिना सहमति वाले व्यवहार को बढ़ावा देने वाला बताते हुए सोशल मीडिया पर तीखी
प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।हालांकि, बाद में प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों ने माफी मांगी थी और अपने इंस्टाग्राम अकाउंट भी निष्क्रिय कर दिए थे। वहीं, गुरुग्राम की एक कंपनी ने भी हिमांशु जांगड़ा को उसकी टिप्पणी के कारण नौकरी से निकाल दिया था।
