Kerala: पूर्व CEO को सीएम का सचिव बनाने पर सियासी घमासान, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा; नियुक्ति पर उठाए सवाल
Keralam | Dr Rathan U. Kelkar, Chief Electoral Officer, Kerala & Secretary, Election Department, is transferred and posted as Secretary to the Chief Minister. pic.twitter.com/eZxnsBuhhS May 23, 2026 “The bigger the theft, the bigger the reward.” But exactly 10 days later, the Congress govt in Keralam led by @vdsatheesan appoints
Keralam | Dr Rathan U. Kelkar, Chief Electoral Officer, Kerala & Secretary, Election Department, is transferred and posted as Secretary to the Chief Minister. pic.twitter.com/eZxnsBuhhS May 23, 2026 “The bigger the theft, the bigger the reward.” But exactly 10 days later, the Congress govt in Keralam led by @vdsatheesan appoints Keralam CEO Rathan Kelkar as Secretary. So Rahul… pic.twitter.com/wfzmuJXpxQ — K Surendran (@surendranbjp) May 23, 2026 रतन यू केलकर 2003 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने हाल ही में हुए केरल विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में पूरी प्रक्रिया की निगरानी की थी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के सुरेंद्रन ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे दोहरा मापदंड बताया। उन्होंने कहा, जब पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐसा ही कदम उठाया था, तो कांग्रेस ने इसे वोट चोरी का इनाम कहा था। सुरेंद्रन ने राहुल गांधी और उनकी टीम को पाखंडी करार दिया।यह विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला किया था। वहां पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को सरकार बदलने के बाद मुख्य सचिव बनाया गया था।
तब राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत है। उन्होंने टिप्पणी की थी कि जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम। अब भाजपा इसी पुराने बयान को आधार बनाकर कांग्रेस को घेर रही है।दूसरी ओर, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस नियुक्ति का बचाव किया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सरकार के पास सक्षम अधिकारियों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्त करने का पूरा अधिकार है। चेन्निथला के अनुसार, रतन केलकर को मुख्यमंत्री का सचिव बनाना सरकार का विशेषाधिकार है।
उन्होंने कहा कि केलकर एक काबिल अधिकारी हैं और इस नियुक्ति में कुछ भी असामान्य नहीं है। सरकार किसी भी अधिकारी को वापस बुलाने और नियुक्त करने की शक्ति रखती है।
