Explainer: क्यों कम हो रहा है भारतीय चीनी का निर्यात; अल नीनो, एथेनॉल या घटता उत्पादन, क्या है असल वजह?
सरकार क्यों बनाना चाहती है एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन? वैश्विक चीनी बाजार पर क्यों बढ़ रहा दबाव? भारत सरकार एथेनॉल को केवल एक वैकल्पिक ईंधन
सरकार क्यों बनाना चाहती है एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन? वैश्विक चीनी बाजार पर क्यों बढ़ रहा दबाव? भारत सरकार एथेनॉल को केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देख रही है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में भारत ने 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया।अब सरकार इससे भी आगे की तैयारी कर रही है।
अब सरकार E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को शामिल करना चाहती है। E85 में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल आधारित ईंधन है। उद्योग के कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सरकारी नीतियां चीनी निर्यात की तुलना में एथेनॉल उत्पादन को अधिक समर्थन दे सकती हैं।एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स की रिपोर्ट अनुसार वैश्विक चीनी बाजार पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि दुनिया के दो सबसे बड़े उत्पादक भारत और ब्राजील दोनों को खाद्य और ईंधन के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
भारत में उद्योग एथेनॉल उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाए रखने के लिए बेहतर कीमतों की मांग कर रहा है।मुंबई में आयोजित चीनी, इथेनॉल और जैव ऊर्जा सम्मेलन में श्री रेणुका शुगर्स के कार्यकारी अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि अगर गन्ने के रस से बनने वाले एथेनॉल की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो उद्योग ज्यादा चीनी बनाने की ओर लौट सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अल नीनो की आशंका के बीच अगले सीजन में गन्ने की फसल इस वर्ष से बेहतर होने की गारंटी नहीं है।एसएंडपी के अनुसार अमेरिकी कृषि विभाग का अनुमान है कि 2026-27 में वैश्विक चीनी उत्पादन घटकर 184.9 मिलियन टन रह सकता है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन ने भी 2026-27 में वैश्विक आपूर्ति घाटे का अनुमान जताया है।ब्राजील में भी स्थिति आसान नहीं है। वहां चीनी की बजाय एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक गन्ना इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार 2026-27 में ब्राजील का चीनी उत्पादन 4.25 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन से कम है।
