Explainer: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगा समुद्री अर्थशास्त्र, इस परियोजना का क्यों हो रहा विरोध?
इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या विवाद है? ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय
इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या विवाद है? ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र लिखा है। इस पत्र में जयराम रमेश ने परियोजना के तहत बनने वाले ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के विकास को लेकर कई स्पष्टीकरण मांगे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि परियोजना में निजी क्षेत्र की न्यूनतम हिस्सेदारी 55 प्रतिशत निर्धारित की गई है, तो क्या 100 प्रतिशत निजी स्वामित्व की अनुमति होगी, या फिर सार्वजनिक संस्थाओं के लिए भी न्यूनतम हिस्सेदारी तय की गई है?
राहुल गांधी ने कोरल रीफ को लेकर क्या दावा किया? राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का दावा है कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आधिकारिक मानचित्रों में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे पर्यावरणीय नियमों की बाधाएं कम होती दिखाई देती हैं। कांग्रेस के अनुसार, 2020 के आधिकारिक मानचित्र में ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों, खासकर गैलेथिया बे, के आसपास व्यापक प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) दर्ज थीं। इसी क्षेत्र में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल विकसित किया जाना है। पार्टी का आरोप है कि 2021 में जारी संशोधित मानचित्र में इन प्रवाल भित्तियों को समुद्र के दूसरे हिस्से में दिखाया गया, जहां उनका प्राकृतिक रूप से मौजूद होना संभव नहीं माना जाता।
कांग्रेस का कहना है कि इस बदलाव ने परियोजना के लिए रास्ता आसान बना दिया। कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि 2020 के मानचित्र में लगभग पूरा द्वीप CRZ-IA (कोस्टल रेगुलेशन जोन-IA) श्रेणी में था, जहां बंदरगाह जैसे बड़े निर्माण कार्यों पर कड़े प्रतिबंध लागू होते हैं। लेकिन 2021 के संशोधित मानचित्र में गैलेथिया बे को इस श्रेणी से बाहर दिखाया गया। पार्टी का आरोप है कि इस पुनर्वर्गीकरण के जरिए परियोजना को नियामकीय मंजूरी दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया गया। कांग्रेस का कहना है कि यह कोई सामान्य पारिस्थितिकीय या वैज्ञानिक अपडेट नहीं था, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने के लिए किया गया प्रशासनिक बदलाव था।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि जब पर्यावरणीय वास्तविकताएं परियोजना के रास्ते में बाधा बनीं, तो उन्हें दस्तावेजों में ही बदल दिया गया।
