कनाडा से कड़वाहट खत्म: पीएम मोदी-कार्नी की केमिस्ट्री से 2026 तक फ्री ट्रेड डील संभव; खनिजों का खुलेगा खजाना
कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया युग शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया
कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया युग शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि दोनों प्रधानमंत्री अब तक चार बार मुलाकात कर चुके हैं। दोनों नेता फोन पर लगातार बात करते हैं। यही नहीं, दोनों के बीच व्हाट्सएप पर भी संवाद होता है। फ्रांस के एवियन शहर में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों के बीच बेहद खास और सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों ही नेता जमीन पर नतीजे देने में भरोसा रखते हैं। दोनों में काम को जल्द से जल्द पूरा करने की एक जैसी तड़प है। यही वजह है कि पुराना तनाव अब बीते दिनों की बात हो चुका है।आर्थिक मोर्चे पर दोनों देश एक नया इतिहास रचने की तैयारी में हैं। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी सेपा (सीईपीए) को साल 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उच्चायुक्त कूटर ने इस डेडलाइन को बेहद व्यावहारिक बताया है। हाल ही में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल देश के अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक दल के साथ कनाडा गए थे।
उनके साथ कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने भी कमान संभाली। इस यात्रा ने ठंडे पड़े रिश्तों की दिशा और दशा को पूरी तरह बदल दिया।दोनों देशों ने अब एक नया और बड़ा लक्ष्य तय किया है। भारत और कनाडा का इरादा साल 2030 तक आपसी व्यापार को तीन गुना करने का है। इसे मौजूदा 17 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर पहुंचाया जाएगा। व्यापारिक जगत भी इस डील को लेकर बहुत उत्साहित है। निवेश की बात करें तो कनाडा ने भारत में लगभग 109 अरब डॉलर का बड़ा निवेश कर रखा है। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कनाडा के कुल निवेश का 25 फीसदी हिस्सा है। दूसरी तरफ, कनाडा में भारत का निवेश करीब 11 अरब डॉलर है। यह नई डील केवल टैक्स में कटौती तक सीमित नहीं होगी। इसका दायरा बहुत बड़ा और व्यापक होगा।कनाडा के पास क्लीन एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) का खजाना है। यह खजाना भारत की औद्योगिक विकास यात्रा के लिए ईंधन का काम करेगा। कनाडा के पास लगभग छह अरब टन धातुकर्म कोयला (मेटालर्जिकल कोल) है। भारत को अपनी भारी इंडस्ट्री के लिए इसकी सख्त जरूरत है।
इसके अलावा, भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को आठ गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करना चाहता है। इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को भारी मात्रा में यूरेनियम चाहिए। कनाडा दुनिया में यूरेनियम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। वह भारत के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लायर बनने को तैयार है।चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए भी यह दोस्ती बहुत अहम है। चीन से बाहर दुनिया में जितने भी दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ्स) के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, उनमें से एक-तिहाई अकेले कनाडा में हैं। कनाडा ने इसके प्रोसेसिंग के लिए सस्केचेवान में उत्तरी अमेरिका का पहला प्लांट भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा, कनाडा अगले एक से दो साल में 50 मिलियन टन प्राकृतिक गैस, एलपीजी और तेल निर्यात करने की क्षमता हासिल कर लेगा। इसके लिए वह अपने पश्चिमी तट पर इंफ्रास्ट्रक्चर को युद्ध स्तर पर अपग्रेड कर रहा है। ब्रिटिश कोलंबिया जैसे राज्यों में खदानों की मंजूरी का समय भी घटाकर सिर्फ एक साल कर दिया गया है।इस पूरी कवायद का सबसे खूबसूरत हिस्सा सुरक्षा के मोर्चे पर आया बदलाव है। पिछले दिनों जो भी तनाव था, उसे पीछे छोड़ते हुए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने एक मजबूत और पारदर्शी सिस्टम बना लिया है।
