हृदय के लिए फलों की मात्रा नहीं, सही चयन जरूरी; जानें फ्लैवानॉल युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने वाले कितने
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस और मार्स इंक. के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन फूड एंड फंक्शन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-डेविस और मार्स इंक. के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन फूड एंड फंक्शन में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका और ब्रिटेन के 30 हजार से अधिक लोगों के आहार संबंधी आंकड़ों और जैविक संकेतकों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि 20% से भी कम लोग उस स्तर तक फ्लैवानॉल का सेवन कर रहे थे।चौंकाने वाली बात यह रही कि कई लोग प्रतिदिन पांच बार फल और सब्जियां खाने के बावजूद भी पर्याप्त फ्लैवानॉल नहीं ले पा रहे थे।
प्रमुख लेखक डॉ. जेवियर ओटावियानी के अनुसार लोग अक्सर मान लेते हैं कि फल और सब्जियां खाने से उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। भोजन में कुछ विशेष फलों, सब्जियों और
पेयों को शामिल करने से फ्लैवानॉल की मात्रा काफी बढ़ सकती है।यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर गुंटर कूनले का कहना है कि दिन में पांच बार फल और सब्जियां खाने की सलाह सही है, लेकिन अब यह
समझने की जरूरत है कि वे पांच विकल्प कौन से हों। अलग-अलग फल और सब्जियां केवल विटामिन और खनिज ही नहीं, बल्कि विभिन्न जैव-सक्रिय यौगिक भी प्रदान करती हैं, जिनके स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।
