Explainer: 21 जून को ही क्यों होता है योग दिवस, कैसा रहा इसका भारत से दुनियाभर में फैलने का 5,000 साल का सफर?
21 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। कभी भारत तक सीमित मानी जाने वाली योग की परंपरा आज एक वैश्विक रूप
21 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। कभी भारत तक सीमित मानी जाने वाली योग की परंपरा आज एक वैश्विक रूप ले चुकी है। शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का संदेश देने वाला योग अब केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का माध्यम बन गया है। भारत से दुनिया तक का सफर साल 2026 में दुनिया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इस बार की थीम है, 'Yoga for Healthy Ageing' यानी स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग।
यह थीम बताती है कि योग केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी है।आइए जानते हैं कि योग भारत से दुनिया तक कैसे पहुंचा? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कैसे हुई? 21 जून ही अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में क्यों चुना गया? 2026 की थीम क्या है? योग दिवस के लोगो का क्या मतलब है? डब्ल्यूएचओ का mYoga एप क्या है? योग क्यों महत्वपूर्ण है? योग की उत्पत्ति 5,000 वर्ष पुरानी भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक साधना से हुई है।
इसका उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है। इसकी नींव रखने में महर्षि पतंजलि का अतुलनीय योगदान है। लंबे समय तक योग मुख्य रूप से भारत और कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रहा। पश्चिमी देशों में भी योग को शुरू में केवल शरीर को फिट रखने और लचीला बनाने वाली एक शारीरिक गतिविधि के रूप में देखा जाता था, लेकिन भारतीय योग संस्थानों और योग गुरुओं के लगातार प्रयासों ने दुनिया को योग के व्यापक लाभों से परिचित कराया।धीरे-धीरे यह समझ विकसित हुई कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है।
योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और आज यह दुनिया के लगभग हर हिस्से में अपनाया जा रहा है।
