Criminal Laws: नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा कर रही सरकार, जांच एजेंसियों से मांगे गए सुझाव
इन अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने BNS और BNSS के संबंध में अपने जवाब दो-तीन पहले लिख कर भेज दिए हैं। एक अधिकारी ने बताया
इन अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने BNS और BNSS के संबंध में अपने जवाब दो-तीन पहले लिख कर भेज दिए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि नए कानून में काफी खूबियां हैं, पर इसमें कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। सबसे बड़ी दिक्कत है--अरेस्ट मेमो को लेकर। नए कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के आधार आरोपी को लिखित रूप में उपलब्ध कराए जाएं और यह जानकारी ऐसी भाषा में दी जाए जिसे वह समझता हो।
हाल के दिनों में विभिन्न न्यायालयों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आरोपी को उसकी समझ की भाषा में गिरफ्तारी के कारण बताना न्यायसंगत प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) कानून 1 जुलाई, 2024 से पूरे भारत में लागू हुआ है। इसी दिन से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) भी लागू किया गया था।।दोनों कानूनों ने अंग्रेजों के जमाने के पुराने IPC और CRPC का स्थान लिया है।
नए कानूनों के लगभग दो साल पूरे होने पर केंद्र सरकार इसका रिव्यू कर रही है। इस संबंध में देश भर की अलग-अलग जांच एजेंसियों से केंद्र सरकार द्वारा सुझाव मांगे गए हैं। महाराष्ट्र में भी डीजीपी ऑफिस के जरिए मुंबई सहित पूरे राज्य की पुलिस को कुछ दिनों पहले सुझाव से जुड़ी एक लिस्ट भेजी गई। मुंबई पुलिस के कुछ अधिकारियों ने हमसे बातचीत में इस बात की पुष्टि की।
एक पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर ने बताया कि उनके पास जॉइंट सीपी लॉ एंड ऑर्डर की तरफ से इस संबंध में लेटर आया था। एक अन्य जांच यूनिट को उनके बॉस की तरफ से यह लेटर आया था।
