'भारत नहीं तो कौन करेगा मदद'? अस्पतालों में दवाएं खत्म, कैंसर मरीजों की जान पर संकट; फलस्तीन ने लगाई गुहार
भारत में फलस्तीन के दूतावास ने मेडिकल मदद के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय और भारतीय दखल की अपील की है। दूतावास का कहना है कि इलाके
भारत में फलस्तीन के दूतावास ने मेडिकल मदद के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय और भारतीय दखल की अपील की है। दूतावास का कहना है कि इलाके में स्वास्थ्य क्षेत्र बेहद गंभीर संकट से गुजर रहा है और 'पूरी तरह ठप होने की कगार पर' है। दूतावास ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारत गणराज्य में फ़िलिस्तीन राज्य का दूतावास, कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र के बुरी तरह चरमराने पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। यह इस्राइल के जारी युद्ध, सैन्य हमलों, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यापक तबाही, मानवीय सहायता तक पहुंच पर कड़ी पाबंदियों और आर्थिक दबाव का सीधा परिणाम है। अभी नहीं तो कब? फलस्तीन के दूतावास की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि हजारों निर्दोष लोगों की जान बचाने का यही सही समय है। अगर भारत और भारत के लोग मदद के लिए आगे नहीं आएंगे, तो कौन? अगर अभी नहीं, तो कब? हर जिंदगी मायने रखती है। फलस्तीन लोग मानवता और न्याय के लिए भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। 'आरोग्य मैत्री' पहल के तहत मदद की मांग दूतावास ने भारत से 'आरोग्य मैत्री' मानवीय पहल के तहत मेडिकल सहायता देने की भी अपील की, जो वैश्विक स्वास्थ्य और आपदा राहत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है।
बयान में कहा गया,'हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आरोग्य मैत्री' परियोजना की घोषणा की थी, जिसके तहत भारत प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय संकटों से प्रभावित किसी भी विकासशील देश को आवश्यक मेडिकल आपूर्ति उपलब्ध कराने का वादा किया था।' WHO के आंकड़ों से जताई गंभीर चिंता दूतावास ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए इसे 'अभूतपूर्व मानवीय तबाही' बताया। दूतावास के अनुसार, क्षेत्र के 36 अस्पतालों में से केवल 19 ही आंशिक रूप से संचालित हो रहे हैं। गाजा के अस्पतालों में दवाओं, उपकरणों, डायलिसिस सामग्री, रक्त यूनिट और जनरेटर चलाने के लिए ईंधन की भारी कमी है। 986 दिनों के युद्ध के बाद बदतर हालात 'इज़राइल के जारी युद्ध के 986वें दिन, गाज़ा पट्टी का स्वास्थ्य तंत्र अभूतपूर्व संकट के स्तर पर पहुंच गया है।' बयान में कहा गया कि WHO ने चेतावनी दी है कि गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है। हजारों मरीजों को इलाज के लिए अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की तत्काल आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने एनेस्थीसिया, एंटीबायोटिक्स, डायलिसिस सामग्री, रक्त यूनिट, सर्जिकल उपकरण, इंसुलिन और अस्पतालों के जनरेटर के लिए आवश्यक ईंधन की भारी कमी की भी रिपोर्ट दी है।" 12 हजार शव अब भी मलबे के नीचे दबे होने का दावा दूतावास ने कहा कि त्वचा रोगों, चूहों से फैलने वाले संक्रमणों और मलबे के नीचे दबे हजारों शवों की मौजूदगी ने विशेष रूप से बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
WHO, UN, UNRWA और अन्य मानवीय संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दूतावास ने कहा कि अनुमानित 12,000 शव अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। इसके अलावा, स्वच्छता व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है और साफ पानी की कमी तथा कचरे के जमाव ने हालात को और भयावह बना दिया है। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम में भी गहराया संकट दूतावास ने कहा कि यह संकट वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम तक फैल चुका है। टैक्स राजस्व रोके जाने से उत्पन्न आर्थिक संकट ने जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस्राइल के आर्थिक प्रतिबंधों और फलस्तीनी कर राजस्व को रोके जाने के कारण सरकारी वित्त पोषण में भारी कमी आई है, जिसका सबसे अधिक असर स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ा है।" 11 हजार से ज्यादा सर्जरी टाली गईं दूतावास ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में भारी गिरावट आई है। केवल इस वर्ष दवाओं और ऑपरेशन क्षमता की कमी के कारण 11,000 से अधिक निर्धारित सर्जरियां स्थगित करनी पड़ी हैं। पिछले वर्ष वेस्ट बैंक के सरकारी अस्पतालों में लगभग 65,000 सर्जरियां की गई थीं, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 19,500 के आसपास सर्जरियां हुई हैं।" 180 जरूरी दवाएं पूरी तरह खत्म दूतावास ने बताया कि फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय 520 आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इनमें से लगभग 180 दवाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।
