महावानरों पर नई खोज: हर प्रजाति के सोच का तरीका अलग, अध्ययन ने खारिज की एकरूप बुद्धिमत्ता की धारणा
मनुष्य की बुद्धिमत्ता और उसके विकासक्रम को समझने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से चिंपैंजी, बोनोबो, गोरिल्ला और ओरंगुटान जैसे महावानरों का अध्ययन करते रहे
मनुष्य की बुद्धिमत्ता और उसके विकासक्रम को समझने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से चिंपैंजी, बोनोबो, गोरिल्ला और ओरंगुटान जैसे महावानरों का अध्ययन करते रहे हैं। आम धारणा यह रही है कि यदि कोई मानसिक क्षमता केवल मनुष्यों और उनके सबसे निकट संबंधी प्राइमेट्स में दिखाई देती है तो वह विकासक्रम में अपेक्षाकृत बाद में विकसित हुई होगी। लेकिन एक नए अध्ययन ने संकेत दिया कि महावानरों की संज्ञानात्मक क्षमताएं न केवल एक-दूसरे से भिन्न होती हैं, बल्कि एक ही प्रजाति के अलग-अलग व्यक्तियों में भी अंतर होता है। इससे यह धारणा कमजोर पड़ती है कि किसी प्रजाति के सभी सदस्य समान तरीके से सोचते और सीखते हैं।
