ग्रामीण भारत की गलियों का बनेगा डिजिटल मैप, मिलेगा यूनिक कोड; केंद्र सरकार लाने जा रही क्या सिस्टम?
नई व्यवस्था में हर सड़क को उसके प्रकार, राज्य, जिला और गांव के आधार पर यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड, क्यूआर कोड और डिजिपिन आधारित भौगोलिक पहचान
नई व्यवस्था में हर सड़क को उसके प्रकार, राज्य, जिला और गांव के आधार पर यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड, क्यूआर कोड और डिजिपिन आधारित भौगोलिक पहचान मिलेगी। अभी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत गांवों तक पहुंचने वाली सड़कों का रिकॉर्ड तो है, लेकिन भीतरी गलियां और संपर्क मार्ग किसी एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस का हिस्सा नहीं हैं। विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग नामों से दर्ज करने के कारण भ्रम, कार्यों की पुनरावृत्ति और सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है।गांव की सभी आंतरिक सड़कें तीन श्रेणियों: मुख्य सड़क, क्रॉस रोड और अन्य/संपर्क मार्ग - में वर्गीकृत होंगी।
हर सड़क डिजिपिन के जरिए सटीक भौगोलिक निर्देशांकों से जुड़ी होगी। यह प्रणाली पीएमजीएसवाई, स्थानीय शासन निर्देशिका तथा डिजिपिन से भी एकीकृत होगी। ग्राम मानचित्र इस पूरी व्यवस्था का केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जो पीएम गतिशक्ति, भुवन और अन्य सरकारी डिजिटल प्रणालियों से भी जुड़ा रहेगा। हर सड़क पर द्विभाषी साइनबोर्ड लगेंगे और क्यूआर कोड स्कैन करने से सड़क की लोकेशन, रखरखाव रिकॉर्ड और नेविगेशन जानकारी मिलेगी।सड़कों की पहचान, नामकरण और कोडिंग की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी जाएगी। हर साल ग्राम पंचायत विकास योजना के साथ इनकी समीक्षा होगी और स्थानीय समितियां नए मार्गों को जोड़ने या बदलाव का सत्यापन करेंगी।
पंचायती राज मंत्रालय परियोजना का नोडल मंत्रालय होगा।इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय, डाक विभाग, एनआरआईडीए, राज्य पंचायती राज विभाग, सर्वे ऑफ इंडिया, एनआईसी, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र, आपातकालीन सेवाएं और निजी जीआईएस-नेविगेशन कंपनियां शामिल हैं। सरकार नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, ग्राम पंचायतों और तकनीकी विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित करेगी, जिनके आधार पर अंतिम नीति तैयार होगी।पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि गांवों की सड़कों और गलियों का कभी नामकरण नहीं हुआ। हालांकि, सरकार का इरादा इनके नामकरण का नहीं है- यह काम ग्राम पंचायतें खुद करेंगी। पर इस पहल के तहत गांव की हर सड़क और गली की कोडिंग होगी।
स्वामित्व योजना के डेटा में पहले से ही हर सड़क-गली का लेखा-जोखा उपलब्ध है। यूनिक कोड मिलने से रास्तों की डिजिटल पहचान आसान होगी, सरकारी योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और सड़क निर्माण, जल निकासी व मरम्मत में पारदर्शिता आएगी। एम्बुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड तेजी से पहुंच सकेंगी तथा डाक व ई-कॉमर्स की अंतिम छोर तक डिलीवरी भी होगी।
