TMC में रार: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- पारिवारिक पार्टियां अल्पकालिक; सत्ता जाते ही पतन शुरू
केंद्रीय मंत्री से विपक्ष के आरोपों पर भी सवाल पूछा गया। विपक्ष का आरोप है कि संसद में दोबारा आने वाले परिसीमन विधेयक के लिए
केंद्रीय मंत्री से विपक्ष के आरोपों पर भी सवाल पूछा गया। विपक्ष का आरोप है कि संसद में दोबारा आने वाले परिसीमन विधेयक के लिए भाजपा जबरन दूसरी पार्टियों को तोड़ रही है। इस पर जितेंद्र सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा करीब 50 वर्षों तक विपक्ष में रही। राज्यों में हमारी सरकारें नहीं थीं, फिर भी हमारी पार्टी कभी नहीं टूटी। ऐसा इसलिए है क्योंकि भाजपा नेताओं की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की पार्टी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कोई पारिवारिक विरासत नहीं है, यह एक सांगठनिक परिवार है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पतन भी पहले ही शुरू हो चुका है।इधर दिल्ली से लेकर कोलकाता तक तृणमूल कांग्रेस गहरे संकट में फंस गई है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है। इन सभी बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में मांग की गई है कि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था अलग की जाए। इन 20 बागी सांसदों ने बताया है कि उन्होंने 'नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) के साथ खुद का विलय कर लिया है।
अब यह पूरा गुट केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार को समर्थन देगा। सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायकों का एक बहुत बड़ा वर्ग भी बगावत की राह पर चल पड़ा है।पार्टी को टूट से बचाने के लिए तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी मैदान में उतर आया है। शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात में टीएमसी नेताओं ने बागी गुट की वैधता को चुनौती दी।
उन्होंने स्पीकर के सामने अपनी बात रखी। टीएमसी ने सख्त रुख अपनाते हुए इन सभी 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं दायर कर दी हैं।दूसरी तरफ, विपक्ष की मुसीबतें सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं हैं। महाराष्ट्र की शिवसेना-यूबीटी भी एक और बड़े विभाजन की कगार पर है। पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद कल बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में नहीं पहुंचे।
