उद्धव की दो टूक: भरोसा नहीं तो पद छोड़ दूंगा, 30 साल BJP संग रहकर विलय नहीं किया; कांग्रेस से कैसे करेंगे?
अपनी पार्टी के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों
अपनी पार्टी के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद मेरा संकल्प कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर पार्टी को मुझ पर भरोसा नहीं है, तो मैं अपना पद छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना का अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हूं। मैं संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं हूं, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस जिम्मेदारी के सही आदमी नहीं हूं, उसी दिन यह पद छोड़ दूंगा।'उद्धव ठाकरे ने भाजपा और कांग्रेस की राजनीति की तुलना करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे हमेशा से तीखे राजनीतिक मतभेद रहे हैं।
विचारों की यह लड़ाई जगजाहिर है। लेकिन कांग्रेस ने कभी भी शिवसेना को जड़ से खत्म करने की कोशिश नहीं की। इसके विपरीत, भाजपा आज शिवसेना का नामोनिशान मिटाने पर तुली हुई है। वह हमारी पार्टी को पूरी तरह बर्बाद करना चाहती है।पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र में भी बगावत की खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। हालांकि, इस बीच उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने साफ कहा कि इन सांसदों के दगा देने से शिवसैनिक बिल्कुल भी निराश या हताश नहीं हैं। इसके उलट, इस धोखे ने शिवसैनिकों के भीतर एक नई आग पैदा कर दी है। वे अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और एकजुट हो गए हैं।भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे भावुक भी हुए।
उन्होंने महाराष्ट्र के उन सभी मतदाताओं से हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर जीते सांसदों को अपना कीमती वोट दिया था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जनता ने चुनकर भेजा, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंप दिया। मैं इन धोखेबाज सांसदों को वोट देने वाले अपने मतदाताओं से दिल से क्षमा मांगता हूं।उद्धव ठाकरे ने देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हमारा देश 'एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं' की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो देश से लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। यह तानाशाही वाली सोच भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
इसके खिलाफ हम सबको मिलकर लड़ना होगा।इसके साथ ही उन्होंने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जो अक्सर उन पर घर से बाहर न निकलने का आरोप लगाते हैं। उद्धव ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से नहीं मिलता था या मैंने पूरे महाराष्ट्र का दौरा नहीं किया था, तो फिर हमने हालिया चुनाव कैसे जीत लिए? यह जीत इस बात का सबूत है कि हमारी जमीन मजबूत है और जनता हमारे साथ खड़ी है। मुंबई के इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया कि असली शिवसेना कौन है।
