Jaishankar On Passport: 'पासपोर्ट अब हर भारतीय का अधिकार', विदेश मंत्री ने बताया पहले से कितनी बदली व्यवस्था
क्यों बढ़ रही है पासपोर्ट की मांग? पासपोर्ट सेवा 2.0 को क्यों बताया गया महत्वपूर्ण? पासपोर्ट सेवा केंद्रों का नेटवर्क कितना बढ़ा?
क्यों बढ़ रही है पासपोर्ट की मांग? पासपोर्ट सेवा 2.0 को क्यों बताया गया महत्वपूर्ण? पासपोर्ट सेवा केंद्रों का नेटवर्क कितना बढ़ा? भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक पहचान कैसे मजबूत हुई? जयशंकर ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 138 लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा भारतीयों की बढ़ती आकांक्षाओं और वैश्विक स्तर पर अवसरों की तलाश को दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोप दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभा की मांग तेजी से बढ़ रही है।
जी7 देशों, फ्रांस और स्लोवाकिया जैसे देशों में भारतीय युवाओं और पेशेवरों की क्षमता को काफी सम्मान मिल रहा है। ऐसे में पासपोर्ट भारतीयों के लिए वैश्विक अवसरों का द्वार बनता जा रहा है।विदेश मंत्री ने कहा कि पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम संस्करण 2.0 ने वैश्विक गतिशीलता को नई पहचान दी है। उनके अनुसार पासपोर्ट केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय पहचान का एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि पासपोर्ट प्राप्त करना नागरिकों के लिए संघर्ष नहीं बल्कि उनका अधिकार बने।
इसी सोच के तहत सेवाओं को और अधिक पारदर्शी तथा डिजिटल बनाया गया है।सम्मेलन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 545 से अधिक हो गई है। इसके अलावा 454 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र भी काम कर रहे हैं। इससे छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों के लोगों को भी पासपोर्ट सेवाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार का दावा है कि इससे आवेदन प्रक्रिया तेज हुई है और नागरिकों को कम समय में पासपोर्ट उपलब्ध हो रहा है।जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति ने देश को विश्व बंधु के रूप में स्थापित किया है।
इसका असर भारतीय पासपोर्ट की साख पर भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय पासपोर्ट को दुनिया के कई देशों में सम्मान और भरोसे के साथ देखा जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में पासपोर्ट सेवा और बेहतर होगी तथा यह भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत और जुड़ा हुआ राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
