'यह मुंबई हमारी है': शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव गुट ने विरोधियों को दिया संदेश, गिनाई उपलब्धियां
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में हालिया बगावत पर तीखा निशाना साधा गया है। इसमें कहा गया कि आज व्यावसायिक सोच वाले कई नकली
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में हालिया बगावत पर तीखा निशाना साधा गया है। इसमें कहा गया कि आज व्यावसायिक सोच वाले कई नकली संगठन खड़े किए जा रहे हैं। शिवसेना की स्थापना कभी किसी व्यापारिक सौदे के लिए नहीं हुई थी। बालासाहेब ने पार्टी को कभी कारोबार नहीं बनने दिया। इसीलिए समय-समय पर उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया जो केवल सौदेबाजी और अवसर की तलाश में थे। इससे मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की धारा शुद्ध बनी रही, जिसकी गूंज आज भी पूरे महाराष्ट्र में सुनाई देती है।संपादकीय के अनुसार, शिवसेना ने मराठी समाज को स्वाभिमान से जीना सिखाया।
लोगों को यह भरोसा दिलाया कि वे गर्व से कह सकें, 'यह मुंबई हमारी है।' पार्टी ने आम लोगों को पार्षद और नेता बनाया। शिवसेना की शाखाओं का नेटवर्क जनता के लिए किसी पारिवारिक अदालत की तरह काम करता था। शिवसैनिकों ने सड़क, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात काम किया। किसी भी अन्याय या दुर्घटना के समय शिवसैनिक ही सबसे पहले मौके पर पहुंचते थे।उद्धव गुट ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के गौरव और स्वाभिमान को खत्म करने की कोशिशें अब तेज हो गई हैं।
पार्टी की शुरुआत से ही महत्वाकांक्षी लोगों ने पीठ में छुरा घोंपा है। संपादकीय में बालासाहेब ठाकरे की उस बात का जिक्र है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पीठ पर इतने घाव हो चुके हैं कि अब नई जगह नहीं बची। इसके बावजूद शिवसेना हर वार सहकर आज इस मुकाम पर है क्योंकि विरोधियों में सामने से लड़ने की हिम्मत नहीं थी।शिवसेना ने समाजसेवा के साथ-साथ हिंदुत्व का शंखनाद भी किया। मलंगगढ़ से लेकर अयोध्या आंदोलन तक पार्टी ने बड़े बलिदान दिए। संपादकीय में सवाल पूछा गया कि क्या आज खुद को हिंदुत्व का समर्थक बताने वाले लोग शिवसेना के योगदान का थोड़ा हिस्सा भी दे पाए हैं?
पार्टी ने हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' के मंत्र को माना है। अंत में कहा गया कि जैसे शिवाजी महाराज ने हिंदुओं की पहचान बचाई, उसी विरासत को बालासाहेब ने आगे बढ़ाया। शिवसेना अमर है।
