योग दिवस पर अनिवार्य हाजिरी का मामला: बंगाल सरकार ने माना सामान्य अपील, हाईकोर्ट ने केस को किया रफा-दफा
मुख्य सचिव का आदेश सभी लोक सेवकों के लिए महज एक सामान्य अपील है। यह कार्यक्रम किसी भी कर्मचारी के लिए अनिवार्य नहीं किया गया
मुख्य सचिव का आदेश सभी लोक सेवकों के लिए महज एक सामान्य अपील है। यह कार्यक्रम किसी भी कर्मचारी के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है। यदि कोई व्यक्तिगत कारणों से नहीं आता, तो उस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद साफ था। अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदाल भट्टाचार्य ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। इसके बाद जस्टिस अमृता सिन्हा ने मौखिक टिप्पणी की।
उन्होंने कहा, 'इस मुकदमे की कोई आवश्यकता नहीं थी।' सरकार के लिखित जवाब के बाद कोर्ट ने माना कि अब इस याचिका को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही मामले को बंद कर दिया गया।कर्मचारी संगठन मुख्य सचिव के जिस आदेश को लेकर आशंकित थे, उस पर हाईकोर्ट ने स्थिति साफ कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में राज्य सरकार के लिखित निर्देशों को दर्ज किया।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया:-यह पूरा विवाद मुख्य सचिव की ओर से जारी एक मेमो के बाद शुरू हुआ था। वामपंथी झुकाव वाले संगठन 'स्टेट कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ वेस्ट बंगाल गवर्नमेंट एम्प्लॉईज' ने इसे चुनौती दी थी। संघ का दावा था कि इस मेमो के जरिए सभी कर्मचारियों की उपस्थिति को अनिवार्य बनाया जा रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव के इस तरह के निर्देश जारी करने के अधिकार पर ही सवाल उठाए थे।इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का कार्यक्रम बेहद बड़ा होने जा रहा है।
मध्य कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर मुख्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होने वाले हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक स्तर पर इसे सफल बनाने की तैयारियां चल रही हैं, जिसके लिए कर्मचारियों से जुड़ने की अपील की गई थी।
