Lucknow, India

25 साल में 364 आधिकारिक मतांतरण, लेकिन चर्चों की संख्या डेढ़ हजार पार

Published 22 May 2026 · politics

जेएनएन, जगदलपुर। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से लेकर 2025 तक यानी इन 25 वर्षों में केवल 364 लोगों ने मतांतरण की आधिकारिक सूचना दी। लेकिन, इस दौरान बस्तर में चर्चों और प्रार्थना केंद्रों की संख्या डेढ़ हजार के पार पहुंच गई। दरअसल, मतांतरण और डी-लिस्टिंग को

जेएनएन, जगदलपुर। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से लेकर 2025 तक यानी इन 25 वर्षों में केवल 364 लोगों ने मतांतरण की आधिकारिक सूचना दी। लेकिन, इस दौरान बस्तर में चर्चों और प्रार्थना केंद्रों की संख्या डेढ़ हजार के पार पहुंच गई। दरअसल, मतांतरण और डी-लिस्टिंग को लेकर बहस के बीच बस्तर में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआइ) से सामने आए आंकड़ों ने नई चर्चा छेड़ दी है। बस्तर में मतांतरितों और आदिवासी समाज के बीच बढ़ रहा तनाव सर्व आदिवासी समाज के जगदलपुर जिला अध्यक्ष दशरथ कश्यप ने आरटीआई के जरिये प्रशासन से मतांतरण से संबंधित जानकारी मांगी थी।

प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़े चौकाने वाले हैं। इसके मुताबिक, नवंबर 2000 से फरवरी 2023 तक बस्तर जिले में केवल 364 लोगों ने ही मतांतरण की आधिकारिक सूचना प्रशासन को दी। वहीं, 2023-25 के बीच किसी ने भी अपने मतांतरण की जानकारी प्रशासन को नहीं दी है, जबकि यहां भारी संख्या में मतांतरण कराए गए हैं। मतांतरण की सरकारी प्रक्रिया होती है आंकड़ों के अनुसार, अजीत जोगी सरकार (2000-2003) के दौरान 232 लोगों ने मतांतरण की सूचना दी थी। तत्कालीन भाजपा शासनकाल (2004-2018) में यह संख्या 131 रही। पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में 2018 से फरवरी 2023 के बीच केवल एक व्यक्ति ने फरवरी 2020 में मतांतरण की जानकारी प्रशासन को दी।

खबरें और भी बता दें कि मतांतरण की सरकारी प्रक्रिया होती है, जिसे पूरा करना जरूरी होता है। आरटीआइ से मिली जानकारी से पता चलता है कि मतांतरण की सूचना देने वालों में से अधिकांश ने सादे कागज पर, तो कुछ ने स्टांप पेपर पर शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई। मतांतरित लोगों के बीच तनाव और मारपीट की कई घटनाएं प्रशासन द्वारा रजिस्टर में जानकारी दर्ज कर ली गई, लेकिन आगे की प्रक्रिया किसी ने पूरी की या नहीं, इसकी सुध नहीं ली गई। जनवरी 2023 से लेकर अब तक नारायणपुर समेत अन्य जिलों में सर्व आदिवासी समाज और मतांतरित लोगों के बीच तनाव और मारपीट की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

मतांतरितों के निधन के बाद उनके शव को गांव में दफनाने के विरोध में कई बार तनाव की स्थिति पैदा हुई है। दिसंबर 2023 में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश के सभी जिलों से मतांतरण की जानकारी मांगी गई थी।

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