Lucknow, India

Great Nicobar: 20 हजार करोड़ के दांव से भारत बनेगा हिंद-प्रशांत का लॉजिस्टिक्स किंग, गेम-चेंजर होगा प्रोजेक्ट

Published 17 June 2026 · world

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पीटीआई से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पीटीआई से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना भारत के समुद्री व्यापार के लिए गेम-चेंजर साबित होगी और अंडमान-निकोबार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी। जोशी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना अब पहले दौर में प्रवेश करने जा रही है और इसका प्रमुख हिस्सा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) देश के समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उपराज्यपाल जोशी के मुताबिक, 'पहले चरण में यह टर्मिनल लगभग 6 मिलियन टीईयू (TEU) कार्गो क्षमता संभालने में सक्षम होगा और इसे बनाने पर करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और कार्य शुरू होने के तीन वर्षों के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अंतिम चरण में इसकी क्षमता बढ़कर 21 मिलियन टीईयू तक पहुंच सकती है, जिससे यह न केवल भारत बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में शामिल हो जाएगा। बता दें कि टीईयू कंटेनर जहाजों की कार्गो क्षमता और बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता मापने की मानकीकृत इकाई है।ग्रेट निकोबार की मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थिति का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि यह बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना में बंदरगाह आधारित विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और आदिवासी समुदायों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।बंदरगाह के साथ एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी कम से कम एक रनवे के अगले तीन वर्षों में चालू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, कैंपबेल बे स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन आईएनएस बाज की मौजूदा रनवे को लगभग तीन किलोमीटर तक विस्तारित किया जा रहा है, ताकि बड़े विमानों का संचालन संभव हो सके।जोशी ने कहा कि ये सभी पहल भारत के ‘विकसित भारत’ के व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की आर्थिक एवं रणनीतिक महत्ता को मजबूत करेंगी।उन्होंने द्वीप समूह में चल रही अन्य पहलों का भी जिक्र किया, जिनमें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ कौशल विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन के लिए हुए समझौते शामिल हैं। इनका उद्देश्य जहाज मरम्मत क्षमताओं को बढ़ाना है।जोशी ने बताया कि स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) के निकट पोर्ट मीडोज में प्रस्तावित शिप-टू-शिप ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल तथा डिगलीपुर के पास अटलांटा बे में प्रस्तावित गहरे पानी के बहुउद्देश्यीय बंदरगाह जैसी परियोजनाएं ग्रेट निकोबार परियोजना को और मजबूती प्रदान करेंगी।

उन्होंने कहा, 'इन विकास कार्यों के साथ अंडमान सागर में अगले पांच वर्षों के दौरान जहाजरानी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इससे यह क्षेत्र पहले जहाज मरम्मत केंद्र और बाद में जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।' वहीं, अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं को लेकर कई अध्ययन जारी हैं और आने वाले वर्षों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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