होर्मुज स्ट्रेट से देवरिया... 8 दिन बाद गांव पहुंचा शिवानंद का शव, देखते ही फफक पड़ी पत्नी और बच्चे
आठ दिन पहले तक परिवार फोन का इंतजार कर रहा था. उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी कर रहा बेटा जल्द घर आएगा. लेकिन मंगलवार
आठ दिन पहले तक परिवार फोन का इंतजार कर रहा था. उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी कर रहा बेटा जल्द घर आएगा. लेकिन मंगलवार को गांव में जो गाड़ी पहुंची, उसमें शिवानंद थे जरूर, मगर जिंदा नहीं.
एंबुलेंस का दरवाजा खुला तो चीख-पुकार मच गई. सैकड़ों लोग जुट गए. लेकिन अंतिम विदाई से पहले परिवार ने सरकार के सामने कुछ सवाल और
पांच बड़ी मांगें रख दीं.
