Lucknow, India

ठाकरे ब्रांड की साख पर लगा बट्टा: बाल ठाकरे के समय एक बार, उद्धव के कार्यकाल में चार बार टूट चुकी शिवसेना

Published 17 June 2026 · india

शिवसेना के स्थापना काल के बाद पार्टी में पहली बार 1991 में छगन भुजबल ने 17 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ी थी। भुजबल ने बालासाहेब

शिवसेना के स्थापना काल के बाद पार्टी में पहली बार 1991 में छगन भुजबल ने 17 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ी थी। भुजबल ने बालासाहेब ठाकरे की कार्यशैली और पार्टी में अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए बगावत की थी। तब भुजबल ने कांग्रेस का दामन थामा था जो शिवसेना के इतिहास का पहला बड़ा राजनीतिक विद्रोह था।

लेकिन, 2003 में उद्धव ठाकरे के शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी चार बार टूटी।2005 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाने का विरोध किया और पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। दूसरा विद्रोह 2006 में हुआ था जब चचेरे भाई राज ठाकरे ने अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की थी।असली झटका जून 2022 में लगा, जब एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों के साथ बगावत की थी।

इस विद्रोह से उद्धव का सीएम पद, पार्टी का नाम और चुनाव निशान भी छिन गया। इस टूट के बाद ही उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा चुनाव में 9 और विधानसभा चुनाव में 20 सीटों तक ही सिमट कर रह गई।बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर 30 साल का वर्चस्व भी इस साल जनवरी में हुए चुनाव में टूट गया।

अभी एकनाथ शिंदे की बगावत के 4 साल भी पूरे नहीं हुए कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद उद्धव से अलग होग नया गुट बना लिया है।

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