Explainer: क्या है कफ सिरप को लेकर आया नया नियम; नई गाइडलाइन की जरूरत क्यों पड़ी?
क्यों उठाया गया यह कदम? समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार 2022 के बाद से भारत में निर्मित कफ सिरप अफ्रीका और मध्य एशिया में 140
क्यों उठाया गया यह कदम? समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार 2022 के बाद से भारत में निर्मित कफ सिरप अफ्रीका और मध्य एशिया में 140 से अधिक बच्चों की मौतों से जुड़ी पाई गई हैं, जिससे दुनिया की "फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड" के रूप में भारत की छवि को झटका लगा। अक्तूबर 2025 में मध्य प्रदेश में भी एक कथित दूषित कफ सिरप से जुड़े मामले में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद सरकार ने कफ सिरप निर्माण इकाइयों पर निगरानी बढ़ाई। केंद्रीय औषधि नियामक (CDSCO) के अनुसार फरवरी तक देश के करीब 90% कफ सिरप निर्माताओं का निरीक्षण किया जा चुका था और नियमों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
गुरुग्राम के सीके बिड़ला अस्पताल के डॉक्टर तुषार तयाल का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक खांसी होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। उनके मुताबिक गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े हालिया मामलों को देखते हुए कफ सिरप की बिक्री पर सख्त निगरानी जरूरी हो गई थी। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी। मध्य प्रदेश में क्या हुआ था? पिछले साल अक्तूबर में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में कई बच्चे अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। जांच में पाया गया कि जिन बच्चों ने एक विशेष कफ सिरप का सेवन किया था, उनमें तीव्र किडनी फेल्योर और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के लक्षण विकसित हुए।
बाद में जांच एजेंसियों ने पाया कि संबंधित सिरप में डायइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की मात्रा अत्यधिक थी। इस कप सिरफ के सेवन से 20 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अधिकारियों द्वारा कराई गई प्रयोगशाला जांच में कम-से-कम एक ब्रांडेड कफ सिरप में डायइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जबकि कुछ अन्य सिरप के नमूनों में भी इसके अंश मिले थे। इसके बाद राज्य और केंद्रीय औषधि नियामकों ने संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने (रिकॉल) का आदेश दिया और जांच पूरी होने तक संबंधित कंपनी के उत्पादन पर रोक लगा दी। मामले में आपराधिक जांच भी शुरू की गई थी।
क्या पहले भी इस तरह के मामले सामने आए? 2019-20 (जम्मू-कश्मीर): दूषित कफ सिरप पीने से कम से कम 12 बच्चों की मौत हुई। 2022 (गाम्बिया): भारतीय निर्मित कफ सिरप से जुड़े मामले में 70 बच्चों की मौत हुई। 2022-23 (उज्बेकिस्तान): भारतीय कफ सिरप के सेवन के बाद 18 बच्चों की मौत की खबर सामने आई।
