Lucknow, India

India-PAK Ties: राजनयिक वार्ता विफल होने पर भारत-पाकिस्तान क्या करें? सुनील आंबेकर ने जन जुड़ाव को अहम बताया

Published 16 June 2026 · india

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भारत और पाकिस्तान के बीच 'जन-जन के जुड़ाव' पर जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भारत और पाकिस्तान के बीच 'जन-जन के जुड़ाव' पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच हुई बातचीत अब तक विफल रही है। आंबेकर ने यह बात पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। आंबेकर ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'पाकिस्तान से बातचीत' संबंधी टिप्पणियां आधिकारिक राजनयिक जुड़ाव के बारे में नहीं थीं। ये टिप्पणियां जन-जन के जुड़ाव से संबंधित थीं। उन्होंने कहा कि सरकारों को बातचीत करनी चाहिए या नहीं, यह राष्ट्रीय हितों से जुड़ी कठिन कूटनीति का मामला है।

इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल होते हैं।इससे पहले होसबाले ने मई में कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर भारत का विश्वास पूरी तरह से गायब है। उन्होंने जन-जन के संपर्क को गतिरोध तोड़ने का सबसे अच्छा तरीका बताया था। भागवत ने भी होसबाले की टिप्पणियों का बचाव करते हुए कहा था कि वे पड़ोसी देश के लोगों के बारे में बात कर रहे थे। आंबेकर ने आगे कहा कि विदेश नीति के निर्णय सरकार पर छोड़ देना सबसे अच्छा है। खासकर संघर्ष या असाधारण परिस्थितियों के समय में।आरएसएस के प्रचार प्रमुख आंबेकर ने कहा कि विदेशी देशों से संबंधित मुद्दे उठने पर राजनीतिक मतभेदों को अलग रखना चाहिए।

विचारों को सरकार तक पहुंचाना चाहिए। सरकार को राष्ट्रीय हित में अंतिम सार्वजनिक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच पारंपरिक जुड़ाव चैनलों से अब तक वांछित परिणाम नहीं मिले हैं। आंबेकर ने कहा कि 'सरकारों, सेनाओं और एजेंसियों के बीच जो भी बातचीत हुई है, वह अब तक विफल रही है। हमने उम्मीद खो दी है। इसलिए, जन-जन का जुड़ाव महत्वपूर्ण है।'आंबेकर ने दोनों देशों के बीच चिकित्सा यात्रा और व्यापार जैसे चल रहे आदान-प्रदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यादों को संरक्षित करने में मदद कर सकती है।

उन्होंने बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में भावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास की अधिक जागरूकता लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को हल करने में योगदान दे सकती है। आंबेकर ने जोर देकर कहा कि "जन-जन का संवाद बहुत महत्वपूर्ण है और इसे जारी रहना चाहिए। इसे राजनीतिक कूटनीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।" उन्होंने आरएसएस के समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद के लिए खुले रहने की बात भी कही।

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